नई दिल्ली। मनमोहन सरकार में केंद्रीय गृहमंत्री की निभाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ShivrajPatil का शुक्रवार को महाराष्ट्र के लातूर में निधन हो गया। उन्होंने 90 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह। बता दें शिवराज पाटिल सात बार लोकसभा सांसद, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री और राज्यपाल जैसे बड़े पद संभाले। उनका सरल और मेहनती जीवन राजनीति में योगदान की मिसाल है। उनकी एक चूक की वजह से उनके सफल राजनीतिक करियर पर दाग लिया था। फिलहाल देश आज उन्हें नम आंखों से विदाई दे रहा है।
पाटिल अपने पूरे राजनीतिक जीवन में सात बार लोकसभा सांसद रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री और राज्यपाल जैसे बड़े-बड़े पदों को भी संभाला। ऐसे में इस बात को देखते को ये कहना गलत नहीं होगा कि राजनीति की दुनिया में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। बता दें कि शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्तूबर 1935 को महाराष्ट्र के लातूर जिले के चाकूर गांव में हुआ था। सरल और मेहनती परिवार के रहने वाले शिवराज पाटिल ने अपने जीनव की शुरुआत शिक्षा और कानून की पढ़ाई से की। इसके बाद धीरे‑धीरे उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
राजनीति जीवन की शुरुआत
शिवराज पाटिल के राजनीति जीवन की शुरुआत लातूर नगरपालिकाध्यक्ष से हुई फिर लातूर की ग्रामीण सीट से उन्होंने साल 1973 से 1980 तक विधायक की भी जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद पहली बार 1980 में शिवराज पाटिल लोकसभा पहुंचे। वे सात बार लातूर लोकसभा सीट से सांसद रहे और 10 जुलाई 1991 से 22 मई 1996 तक उन्होंने लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। इतना ही नहीं पाटिल पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में रक्षा राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।
गृह मंत्रालय पद से देना पड़ा इस्तीफा
कई बड़े पदों को जिम्मेदारी पूर्ण संभालाने वाले शिवराज पाटिल के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय संघर्षपूर्ण रहा। वे 22 मई 2004 से 30 नवंबर 2008 तक भारत के केंद्रीय गृह मंत्री रहे। ऐसे में पाटिल के समय में देश ने कई महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया। लेकिन 2008 में 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के बाद उनकी सुरक्षा नीतियों और सार्वजनिक व्यवहार की वजह से ढेरो सवाल उठने लगे। दरअसल जब मुंबई में आतंकी हमला तो वह ब्रीफिंग के दौरान अलग—अलग शूट में नजर आए थे, इस मुददे पर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। इसके बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
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