बहराइच: यूपी के बहराइच जिले में 14 माह पहले दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमा विसर्जन के दौरान भगवा ध्वज फहराने पर Ramgopal Mishra की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी। पूरे प्रदेश को हिलाकर रख देने वाले जघन्य कांड में अब जाकर पीड़ित परिवार को न्याय मिल सका। कोर्ट ने मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा और नौ को उम्रकैद की सजा सुनाई। मामले में दोषी अब्दुल हमीद, मोहम्मद फहीम, सैफ अली, मोहम्मद तालिब, जावेद खान, मोहम्मद जीशान, शोएब खान, ननकऊ व मारूफ को आजीवन कठोर कारावास से दंडित किया। सभी दोषियों पर अलग-अलग अर्थदंड भी लगाया गया है। फैसले के दौरान कचहरी परिसर का बाहरी इलाका पुलिस छावनी में तब्दील रहा।
13 अक्तूबर 2024 को हुई थी हिंसा
बहराइच के महसी तहसील क्षेत्र के महराजगंज में 13 अक्तूबर 2024 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद शुरू हुआ। इस दौरान रेहुआ मंसूर गांव निवासी रामगोपाल मिश्रा की जघन्य हत्या कर दी गई। इस वारदात के बाद पूरे जिले में तनाव बढ़ा। महसी क्षेत्र में दंगा शुरू हो गया। हालात नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ा। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश हुए। इंटरनेट सेवा भी बाधित करनी पड़ी। करीब एक सप्ताह तक हालात खराब रहे।
आरोपियों पर दर्ज हुई नामजद रिपोर्ट
मामले में हरदी एसओ सुरेश कुमार वर्मा व महसी चौकी इंचार्ज शिव कुमार सरोज को निलंबित किया गया था। रामगोपाल के परिजनों की तहरीर पर हरदी पुलिस ने 13 अक्तूबर को ही फहीम, सरफराज उर्फ रिंकू, मोहम्मद तालिब उर्फ सबलू, सैफ अली, जावेद खान, मोहम्मद जीशान उर्फ राजा, शोएब खान, ननकऊ, खुर्शीद, शकील अहमद उर्फ बबलू, मोहम्मद अफजल उर्फ कल्लू को नामजद किया।
हत्या, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद के तीन बेटे सरफराज, मोहम्मद फहीम, मोहम्मद तालिब वारदात में शामिल पाए गए। न्यायालय ने बृहस्पतिवार को जब सरफराज को फांसी की सजा सुनाई, उस समय अब्दुल हमीद और उसके दोनों बेटे फहीम व तालिब पास ही खड़े थे। सजा सुनते ही तीनों की आंखें भर आईं। फांसी की सजा पाए सरफराज उर्फ रिंकू पर 1.30 लाख का अर्थदंड लगाया गया है। अब्दुल हमीद पर 1.81 लाख, फहीम, सैफ अली, ननकऊ, जिशान, शोएब, मारूफ अली और फहीम पर डेढ़-डेढ़ लाख, जावेद पर 1.20 लाख और तालिब पर 50 हजार का अर्थदंड लगाया गया है।
तीन दोषियों को किया बरी
कोर्ट ने तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए कर दिया था बरी,पुलिस ने 11 जनवरी 2025 को आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। नौ दिसंबर को प्रथम अपर जिला व सत्र न्यायाधीश ने खुर्शीद, शकील उर्फ बबलू और मोहम्मद अफजाल उर्फ कल्लू को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया और 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया।अभियोजन व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए घटना में सरफराज उर्फ रिंकू पर कड़ी टिप्पणी करते हुए फांसी की सजा सुनाई। नौ अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए अलग-अलग अर्थदंड लगाया। अर्थदंड की धनराशि अदा न करने पर सभी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
फैसला सिर आंखों पर, पति को मिला न्याय
