यह कैसा विवाह : लाल जोड़े की जगह tops and jeans में पहुंचीं दुल्हनें, उपहार के लिए बारिश में भीगते रहे वर-वधु

What kind of wedding is this? Brides arrived in tops and jeans instead of traditional red bridal attire, while the bride and groom stood getting drenched in the rain as they waited for gifts.

कई दुल्हनें सलवार-सूट में पहुंचीं तो कुछ जींस-टॉप और जींस-कुर्ता पहनकर ही विवाह की रस्मों में शामिल हो गईं।

कानपुर। विवाह किसी युवती के लिए सबसे यादगार लम्हा होता है, इस​के लिए वह सबसे सुंदर दिखने के लिए सजती संवरती है। इसके ​विपरित गुरुवार को मुख्यमंत्री सामूहिक योजना के तहत हुए विवाह में इससे अलग नजारा देखने को मिला जहां दुल्हने लाल जोड़े की जगह tops and jeans  में पहुंची, यहां तक कि कई ने ​तो सिंदूर भी नहीं डलवाया। बस खानापूर्ति करके फोटो खींचवाया और उपहार लेकर चलता बनी। कुछ जोड़ों के पहले से प्रेम विवाह करने की बात भी सामने आई। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह आयोजन वास्तव में जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए था या सरकारी योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं के लिए विवाह की औपचारिकता निभाई जा रही थी?

बिधनू के कठेरूवा स्थित एक गेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत चार दिवसीय आयोजन का शुभारंभ हुआ। पहले दिन भीतरगांव ब्लॉक के 108 जोड़ों को विवाह के लिए बुलाया गया था। इनमें 10 मुस्लिम जोड़े भी शामिल थे। समारोह में वरमाला, सात फेरे और निकाह की रस्में संपन्न कराई गईं।

किसी ने नहीं पहना दुल्हन का जोड़ा

आमतौर पर विवाह समारोह में दुल्हन लाल जोड़े, आभूषण और पारंपरिक साज-सज्जा में नजर आती है, लेकिन यहां कई दुल्हनें सलवार-सूट में पहुंचीं तो कुछ जींस-टॉप और जींस-कुर्ता पहनकर ही विवाह की रस्मों में शामिल हो गईं। सात फेरे और वरमाला के बाद जब मांग भरने की रस्म आई तो किसी ने पूरी मांग भरवाई तो किसी ने केवल माथे पर टीका लगवाकर रस्म पूरी कर ली। सवाल यह नहीं कि कोई दुल्हन किस तरह के कपड़े पहनकर शादी करे, बल्कि सवाल यह है कि विवाह की वास्तविक स्थिति और योजना के पात्रता संबंधी मानकों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।

मांग भरने के बजाय लगवाया टीका

भीतरगांव ब्लॉक के बरईगढ़ निवासी छंगू सोनकर की बेटी चांदनी घाटमपुर के गुजेला निवासी रामप्रसाद के बेटे शैलेंद्र कुमार के साथ विवाह करने पहुंची। चांदनी जींस-टॉप में थी। विवाह की रस्म के दौरान उसने मांग में सिंदूर भरवाने के बजाय माथे पर टीका लगवाया। इसी तरह नौरंगा निवासी बालगोविंद की बेटी अंजलि ने दिल्ली निवासी फूलचंद्र के बेटे राहुल कुमार के साथ विवाह किया। इस जोड़े में भी मांग भरने की रस्म के स्थान पर माथे पर टीका लगाया गया। मोहम्मदपुर निवासी रामबली कुरील की बेटी लक्ष्मी और घाटमपुर के कंधौली निवासी मोहित के विवाह में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला बता दें कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 64 हजार नकद, 21 हजार के उपहार और 15 हजार आयोजन पर खर्च के लिए दिया जाता है। इस तरह योजना के तहत प्रति जोड़े पर कुल एक लाख रुपये की सहायता दी जाती है।

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