कोलकाता। भतीजे के मोह में खोई पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख Mamata की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है। चुनाव हारने के बाद एक—एक कर उनके समर्थक साथ छोड़ते जा रहे है। पहले विधायकों ने बागवत किया, इसके बाद सांसदों ने अब उन पर चुनाव के दौरान सांप्रदायिक बयान देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई है। उन पर विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता में धरना मंच से कथित तौर पर सांप्रदायिक टिप्पणी करने का आरोप है। इस मामले में उनके खिलाफ नेताजी नगर थाने में शिकायत दर्ज की गई है। मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल प्रकरण की जांच जारी है।
कानूनी कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता तुषार कांति दास ने आरोप लगाया कि उनके बयान भड़काऊ थे और इनसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था। शिकायत में कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि ममता बनर्जी की इन टिप्पणियों से अलग-अलग समुदायों के बीच डर असुरक्षा और तनाव पैदा हो सकता था, साथ ही सार्वजनिक सद्भाव और लोकतांत्रिक माहौल पर भी बुरा असर पड़ सकता था। बता दें कि इससे पहले वकील रिंकी चट्टोपाध्याय सिंह की शिकायत पर सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में ममता बनर्जी के खिलाफ मई में एक एफआईआर दर्ज की थी। वकील ने आरोप लगाया गया था कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने सनातन धर्म को न सिर्फ गंदा धर्म कर धार्मिक भावनाओं को आहत किया, बल्कि यह भी कहा कि एक खास समुदाय दूसरों को पांच मिनट में खत्म कर सकता है।
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