नईदिल्ली। विपक्ष इस समय किसी भी हाल में एनडीए को सत्ता को कुर्सी से हटाने के लिए बेचैन इसके लिए चाहे जिन संगठनों से गठबंधन करना पड़े वे पीछे नहीं हट रहे है। लेकिन इंडिया गठबंधन के नेता अपने बड़बोलेपन और झूठ की वजह से आय दिन जनता की नजर में अपनी बेइज्जती करा रहा है। पहले तोRahul Gandhiको अनाप— शनाप बयानों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब बिहार में बड़े नेता के रूप में खुद को स्थापित करने में जुटे लालू के लाल भी झूठ का सहारा लेने लगे। शनिवार को दोनों नेताओं ने ऐसा झूठ बोला, जिस पर सत्तापक्ष ही नहीं देश की पूरी जनता थू— थू करने लगी है। अब इस तरह की बयानबाजी से विपक्ष तो जनता की आवाज बनने की जगह अपनी ही आवाज को खोता जाएगी। जनता उनकी बातों को तवज्जों नहीं देगी।
अरुण जेटली पर बयान देकर फंसे राहुल
भाजपा के दिवंगत नेता अरुण जेटली पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने धमकाने के आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी के दावों पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि जिन कृषि कानूनों को आधार बनाकर राहुल गांधी ने जेटली पर उन्हें धमकाने के आरोप लगाए हैं, उनका अस्तित्व ही जेटली के निधन के बाद सामने आया। हालांकि राहुल गांधी ने आज जो दावा किया है कुछ वैसी ही बात उन्होंने पिछले साल अपने भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर 17 मार्च को मुंबई में आयोजित रैली में भी की थी। एक कार्यक्रम में आज राहुल गांधी ने “अरुण जेटली वाले किस्से” में भूमि अधिग्रहण बिल की जगह कृषि कानूनों का जिक्र कर कह दिया कि जेटली को धमकी देने के लिए भेजा गया और उन्होंने कहा कि आपने कृषि कानूनों के खिलाफ मुहिम बंद नहीं की तो हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी।
हालांकि उस वक्त राहुल गांधी ने दावा किया था कि अरुण जेटली ने उनसे भूमि अधिग्रहण बिल का विरोध नहीं करने को लेकर आगाह किया था कि “भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ बोलोगे तो आपके ऊपर केस दर्ज करेंगे”। दूसरी तरफ बीजेपी अब राहुल गांधी के बयान को बेबुनियाद बताकर हमलावर है. अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली ने भी राहुल गांधी के बयान पर तीखा एतराज जताते हुए कहा कि पहली बात तो यही है कि राहुल गांधी जिन कानूनों की बात कर रहे हैं, वो जेटली के निधन के बाद आए हैं। फिलहा कांग्रेस राहुल गांधी के मुंबई वाले बयान के जरिए सोशल मीडिया पर बीजेपी का काउंटर कर रही है।
तेजस्वी के आरोप को चुनाव आयोग ने नकारा
इसी तरह बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने शनिवार को दावा किया कि उनका नाम चुनाव आयोग की ओर से जारी किए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है। पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए आरजेडी नेता ने कहा, ‘मैंने बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म भरा था, लेकिन ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मेरा नाम नहीं है। मैं आगामी विधानसभा चुनाव कैसे लड़ूंगा?’ तेजस्वी यादव के इस दावे पर चुनाव आयोग का रिएक्शन भी सामने आया है। थोड़ी ही देर में चुनाव आयोग ने तेजस्वी के दावों को झूठा करार देते हुए बयान जारी कर बताया कि उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में 416वें पर दर्ज है। इसलिए, यह दावा कि उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं है, झूठा और तथ्यात्मक रूप से गलत है।
तेजस्वी यादव ने अपने मोबाइल पर चुनाव आयोग के एप्लीकेशन पर EPIC नंबर डालकर चेक करते हुए कहा कि मेरा नाम वोटर लिस्ट में नहीं है। उन्होंने इसका वीडियो भी पत्रकारों को दिखाया। तेजस्वी ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए आपको बिहार का वोटर होना चाहिए, तब जाकर चुनाव लड़ पाएंगे। कुछ देर बाद ही पोल खुलने पर उनकी बोलती बंद हो गई। बता दें बिहार में SIR की प्रक्रिया एक सितंबर, 2025 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद खत्म होगी। अभी जो वोटर लिस्ट इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर जारी की गई है, वो फाइनल नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहले ही आश्वासन दे चुके हैं कि बिहार के सभी मतदाताओं और राजनीतिक दलों को संशोधित वोटर लिस्ट पर एक अगस्त से एक सितंबर तक दावे और आपत्तियां देने के लिए आमंत्रित किया जाएगा, अगर तेजस्वी यादव का नाम सही में वोटर लिस्ट में नहीं शामिल नहीं होत है, तो उन्हें भी इसे ठीक कराने के लिए दो महीने का समय मिलता।
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