प्रशासन संवेदनशील बनें और बसंत कुंज के नागरिकों के शिक्षा-स्वास्थ्य व रोजगार की तत्काल गारंटी करे : लखनऊ बचाओं संघर्ष समिति

● सरकारी तानाशाही का शिकार बना अकबरनगर का अजीज
● मृतकों के परिजनों को मिले मुआवजा, अकबरनगर पुनर्स्थापित हो

29 जुलाई 2024, लखनऊ। अकबरनगर से विस्थापित होकर बसंत कुंज कॉलोनी में रह रहे दर्जी का काम करने वाले अजीज की आत्महत्या करने की घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए लखनऊ बचाओं संघर्ष समिति ने लिए राजनीतिक प्रस्ताव में कहा कि योगी सरकार की मनमर्जीपूर्ण, अन्यायपूर्ण और तानाशाही पूर्ण कार्यवाही का शिकार अजीज हुआ है। समिति ने प्रस्ताव में कहा कि अकबरनगर से विस्थापित कर बसंत कुंज में बसाए नागरिक गहरे संकट का सामना कर रहे हैं। जैसी की रिपोर्ट है कि अब तक 13 मौतें हो चुकी है। जिनमें से कई लोगों की हार्ट अटैक, अवसाद एवं अन्य मानसिक तनाव के कारण मौतें हुई है। सरकार ने जिस तरह से अकबरनगर की बस्ती को बुलडोज किया और लोगों को अमानवीय स्थिति में वसंत कुंज में रहने के लिए मजबूर किया वह निंदनीय है।

प्रस्ताव में कहा गया कि आज वसंत कुंज में हालात यह है कि शहर से काफी दूर बसी बस्ती में लोगों के रोजगार का गहरा संकट है, सम्मानजनक जीवन जीने के लिए न्यूनतम सुविधाओं का भी गहरा अभाव है। मंडलायुक्त महोदया ने पिछले दिनों जनपद के लगभग सभी विभागों के शीर्ष अधिकारियों के साथ वसंत कुंज कॉलोनी का दौरा किया था। लेकिन कोई भी बुनियादी बदलाव वहां नहीं हुआ। जुल्म की इंतहा यह है कि मृतक गरीब अजीज अकबरनगर से विस्थापन के बाद भी वहां तिरपाल लगाकर अपनी आजीविका के लिए सिलाई का काम करता था। 20 जुलाई को मुख्यमंत्री के सौमित्र शक्ति वन उद्घाटन के कारण 19 तारीख को उसकी सिलाई मशीन तक नगर निगम द्वारा जब्त कर ली गई और जुर्माना देकर ही उसको छोड़ा गया। अपने परिवार की आजीविका चलाने में पैदा हो रही कठिनाइयों के कारण वह जबरदस्त अवसाद में था और अंतोगत्वा उसने आत्महत्या करने का काम किया। संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि तत्काल अजीज के परिजनों को समुचित मुआवजा दिया जाए और अकबरनगर की बस्ती को पर्याप्त मुआवजे के साथ वहीं पर पुनर्स्थापित किया जाए, जब तक अकबरनगर के नागरिकों का पुनर्स्थापन न हो तब तक वसंत कुंज में रहने वाले लोगों के रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं का तत्काल इंतजाम किया जाए और अजीज पर दमन करने वाले नगर निगम के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। संघर्ष समिति अकबरनगर के नागरिकों से भी अपील करती है कि वह आत्महत्या जैसी कार्रवाइयों में न जाए और संघर्ष समिति द्वारा चलाए गए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन के साथ मजबूती से खड़े रहे।
प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त करने वालों में लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रोफेसर रूपरेखा वर्मा, सीपीएम की राज्य सचिव मंडल सदस्य मधु गर्ग , वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता डाक्टर रमेश दीक्षित, ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर, कांग्रेस के शहर अध्यक्ष डॉक्टर शहजाद आलम, सीपीआई से कांक्ति मिश्रा, भाकपा माले के मधुसूदन मगन, जागरूक नागरिक मंच की कात्यायनी व सत्यम, अकबरनगर के नेता इमरान राजा, समाजवादी पार्टी के पूर्व सचिव शर्मिला महाराज, युवा मंच के शानतम, एपवा की मीना सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता नाईस हसन, ट्रांस गोमती निवासी संघर्ष समिति के संयोजक राकेश मणि पांडे, मोहम्मद सलीम, किसान सभा के प्रवीन सिंह रहे।

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