हमीरपुर। WomanCommitsSuicide : यूपी के हमीरपुर से पुलिस की अमानवीयता की एक चौंकाने वाली खबर सामने आई। यहां हेलापुर गांव में शनिवार को एक महिला ने फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। लेकिन आगे की जांच—पड़ताल के लिए फारेंसिक टीम को आने में चार घंटे लग गए। इस दौरान शव भी चार घंटे फंदे पर लटकी रहीं और पुलिस वाले पहरा देते रहे। चार घंटे बाद फंदे से उतारा जा सका। अस्पताल में डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
वहीं इस मामले में एएसपी अरविंद कुमार वर्मा ने इसे आत्महत्या बताया है। महिला के पिता का कहना है कि पुलिस ने खुद से ही मान लिया कि मौत हो गई, जबकि उसे अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद जान बच जाती। परिवार के अन्य लोगों का आरोप है कि सिपाही किसी को कमरे में नहीं जाने दे रहे थे। पुलिस की दलील है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत सात साल से ज्यादा की सजा वाले मामलों में घटना के समय फारेंसिक जांच जरूरी है, जबकि फारेंसिक के जानकार बताते हैं कि आत्महत्या के मामलों में अगर हत्या का आरोप नहीं लग रहा तो शव फंदे से उतारा जा सकता है।
महिला ने की थी दूसरी शादी
नरेश कुशवाहा की पहली पत्नी की 2013 में मृत्यु हो चुकी है। नरेश ने 2015 में बांदा निवासी गुड़िया से दूसरी शादी की थी। नरेश काम पर गए थे तो छोटी बेटी व बेटा स्कूल। घर में पत्नी और बड़ी बेटी मोहिनी थी। दोपहर पौने 12 बजे बेटी ने फोन कर बताया कि मां ने फंदा लगा लिया। उसने यूपी-112 को भी बताया। पुलिस करीब 12 बजे पहुंच गई। फारेंसिक टीम को बताया गया तो पता चला कि टीम जरिया क्षेत्र में दुष्कर्म के मामले की जांच करने जा रही है। दोनों घटनास्थल के बीच 150 किमी की दूरी है। टीम ने पहले वहां जांच की फिर हेलापुर पहुंची। चार बजे शव उतारा गया।
एएसपी ने बताया कि एक ही फील्ड यूनिट की टीम है। इससे समस्या हो रही है। अधिवक्ता विजय द्विवेदी का कहना है कि महिला को अस्पताल पहुंचाना चाहिए था। डाक्टर की पुष्टि के बाद ही किसी को मृत माना जा सकता है।जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डा. आरएस प्रजापति ने बताया कि किसी व्यक्ति की मौत फंदे से तय होती है। फंदा ढीला होने की स्थिति में मृत्यु में पांच से सात मिनट लगते हैं। समय से अस्पताल पहुंचाने पर जान बचाई जा सकती है।
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