लखनऊ । सोमवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह में एमबीबीएस छात्रा दीप्ति शर्मा ने इतिहास रच दिया। समारोह में कुलाधिपति, राजनाथ ने दीप्ति को एक नहीं, दो नहीं पूरे 16 गोल्ड मेडल प्रदान किये। इसी के साथ केजीएमयू के इतिहास में एक और नाम दीप्ति शर्मा का भी जुड़ गया। दरअसल किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का 22वां दीक्षांत समारोह सोमवार को कन्वेशन सेंटर में आयोजित किया गया।
समारोह में एमबीबीएस की छात्रा दीप्ति शर्मा पर सोने की बारिश हुई। वह केजीएमयू के इतिहास में हेवेट गोल्ड मेडल और चांसलर गोल्ड मेडल दोनों एक साथ हासिल करने वाली सातवीं छात्रा बनीं। दीप्ति शर्मा को हेवेट गोल्ड मेडल, चांसलर गोल्ड मेडल, यूनिवर्सिटी ऑनर्स गोल्ड मेडल और प्रोविंशियल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन गोल्ड मेडल समेत कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। उन्हें कुल 16 मेडल और प्रमाणपत्र प्रदान किए गये।
अन्य पुरस्कारों में एमएमबीबीएस के अनुसूचित जाति वर्ग में डॉ. आरएमएल मेहरोत्रा मेमोरियल गोल्ड मेडल निधि सिंह को मिला। बीडीएस वर्ग में अभिलाषा घोष, जिन्हें सात गोल्ड और सिल्वर मेडल मिले तथा अनीकेत चंद्र सक्सेना को भी सम्मानित किया गया। समारोह में कुलपति प्रशंसा पुरस्कार ट्रॉमा टीम, एचआरएफ टीम और चयनित संकाय सदस्यों को दिए गये। ऑर्थोडॉन्टिक्स एवं डेंटोफेशियल ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रो.प्रदीप टंडन को लाइफटाइम डेडिकेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
1701 विद्यार्थियों को मिली उपाधि व 54 पदक
समारोह में इस वर्ष केजीएमयू ने कुल 1,701 उपाधियां व 54 पदक प्रदान किए गए। इनमें विश्वविद्यालय परिसर के 515 और 11 संबद्ध मेडिकल कॉलेजों और सात नर्सिंग कॉलेजों के 1,186 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं। डिग्री प्राप्त करने वालों में 975 पुरुष और 726 महिलाएं शामिल हैं।
20 मेधावी विद्यार्थियों को मंच पर बुलाकर पदक और पुरस्कार दिए गये। इनमें 11 पुरुष और 9 महिलाएं हैं। पुरस्कार पाने वालों में 12 सामान्य वर्ग, 3 अन्य पिछड़ा वर्ग, 4 अनुसूचित जाति और 1 अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं। वहीं नीति आयोग के सदस्य और एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ.एम श्रीनिवास को डॉक्टर ऑफ साइंस (ऑनोरिस कॉजा) की मानद उपाधि प्रदान की गई।
चिकित्सक को मिला सम्मान
सम्मान के इसी क्रम में डीएम व एमसीएच में डॉ. प्रभात शुक्ला – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, डॉ. प्रीति गुप्ता – न्यूरोलॉजी, डॉ. सरितेश कुमार ठाकुर – न्यूरोलॉजी, डॉ. जितेंद्र यादव – यूरोलॉजी, डॉ. रूपल प्रसाद – रूमेटोलॉजी, डॉ. साकेत रामरायका – कार्डियोलॉजी, डॉ. सिद्धार्थ शर्मा – कार्डियोलॉजी, डॉ. शुभ्रा श्रीवास्तव – पल्मोनरी मेडिसिन, डॉ. जेसन गोलमेई – न्यूरोसर्जरी, डॉ.श्रीवत्स मिश्रा – प्लास्टिक सर्जरी को सम्मानित किया गया।
अन्य प्रमुख सम्मान साक्षी त्रिपाठी : पद्मश्री डॉ. सब्यसाची सरकार गोल्ड मेडल (एमएससी नर्सिंग), डॉ. शालिनी सिंह और डॉ. अरित्र साहा : सर्वश्रेष्ठ पीजी थीसिस पुरस्कार निखिल वर्मा : बकले कप, दिव्यांशी सिंह : चैंपियन एथलीट (बालिका) पुरस्कार से नवाजा गया।

स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा भारत: राजनाथ सिंह
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि लखनऊ से सांसद व देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डॉक्टर का पेशा सिर्फ इलाज करने का नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। मरीज डॉक्टर के पास सिर्फ दवा लेने नहीं, बल्कि भरोसा लेकर आता है। इसलिए हर डॉक्टर को अपने ज्ञान के साथ संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार भी बनाए रखना चाहिए ।
उन्होंने कहा कि कई बार डॉक्टर का अपनापन, मुस्कान और भरोसा दिलाने वाले शब्द भी मरीज के इलाज में बड़ी भूमिका निभाते हैं। अपने संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने मेडिकल छात्र—छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज जब आप इस पेशे में प्रवेश कर रहे हैं, तब यह संकल्प लेकर जाएं कि आप प्रत्येक मरीज का समान भाव से उपचार करेंगे।
डाक्टरों को राज्यपाल की सलाह
कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि मुझे खुशी है कि केजीएमयू 19 लाख से ज्यादा मरीजों का ओपीडी में इलाज होता है। जब कोई किसान, बुजुर्ग, मां उपचार के लिए आपके द्वार पर आए तब कोई डॉक्टर ही नहीं, उसके परिवार बनकर सेवा करिए। किसी भी मरीज को निराश होकर लौटना नहीं पड़े। प्रत्येक मरीज को समय पर सही इलाज मिले। प्रत्येक डॉक्टर को अपने जीवन के प्रारंभिक दौर में 2 से 3 साल ग्रामीण इलाकों में होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि जो निजी क्लीनिक चलाते हैं, उन्हें भी गरीबों को रियायत और निशुल्क इलाज करना चाहिए। ये गर्व का विषय है कि 90 करोड़ भारतीयों की सुरक्षित डिजिटल हेल्थ आईडी बनाई गई है। मेरा आपसे यही कहना है कि सीखना कभी मत छोड़िए। नवाचार को अपने जीवन में शामिल करें। साथ ही अपने स्वास्थ्य का भी उतना भी ध्यान रखिए… जितना अपने रोगियों का ध्यान रखते हों। वहीं समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कई सवाल भी दागे।
केजीएमयू प्रशासन को नसीहत
समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा- पिछले 15 से 20 दिन में करीब 10 दीक्षांत समारोह में रही हूं। डिजिलॉकर में डिग्री-मार्कशीट अपलोड होती है। इसे डाउनलोड करने वालों की संख्या काफी कम है। आप लोगों का काम कहां से चल रहा है। आपके यहां स्ट्रेचर बढ़ाने की जरूरत, हॉस्टलों में वाशिंग मशीन नहीं है। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जनभवन की टीम ने पिछले दिनों करीब 90 कैंपस का विजिट किया है।
आपके न्यू ऑर्थोपेडिक कैंपस में 10 साल से निर्माणाधीन बिल्डिंग अभी तक बनी नहीं। 4 भवनों का डिजाइन आपकी जरूरत के अनुरूप है या नहीं, देख लीजिए। ओपीडी और ट्रॉमा में मरीजों की संख्या ज्यादा है। स्ट्रेचर की संख्या और बढ़ाने की जरूरत है। उसकी क्वालिटी सही करिए। लगभग सभी 18 हॉस्टल में वाशिंग मशीन नहीं है। उसे लगाए। खाने में पनीर का उपयोग होता है, पर वह अमूल जैसी डेयरी का होना चाहिए। तीन हॉस्टल में नॉनवेज बनता है। इनमें से एक में एवरेस्ट का एक्सपायर मसाला मिला है।
मिसाइल सीधे अब आतंकवादी की खटिया में लगेगी : ब्रजेश पाठक
अपने संबोधन सूबे के डिप्टी सीएम एवं हेल्थ मिनिस्टर ब्रजेश पाठक ने कहा कि लखनऊ के लिए पहले कहा जाता था कि मुस्कुराइए आप लखनऊ में हैं। अब अगर पड़ोसी गड़बड़ करेगा तो उसे मुस्कुराने की जरूरत नहीं है। उसे उल्टा बयाना मिल सकता है। क्योंकि यहां ब्रह्मोस बन रही है। मिसाइल से निशाना लगाने की भी जरूरत नहीं। सीधे कंप्यूटर से निशाना लगता है। बस कंप्यूटर से सेट कर देंगे कि आतंकवादी जहां सो रहा है। उसके कमरे में घुसते हुए सीधे खटिया में मिसाइल लग जाएगी। उन्होंने कहा कि लखनऊ को रक्षामंत्री ने बहुत कुछ दिया है। लखनऊ के चारों ओर सड़कों का जाल है। उन्होंने कहा कि कानपुर का सफर कितना कठिन था। अब केवल 45 मिनट में कानपुर पहुंचिए। बिना जाम के सफर करिए।
केजीएमयू को ताल्लुकेदारों ने बनवाया किंग जार्ज ने नहीं
स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वरशरण सिंह ने अपने संबोधन के दौरान बताया कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी नाम से लोग सोचते होंगे कि इसे किंग जॉर्ज ने बनाया था। आपको बता दूं कि इसे बनाने में किंग जॉर्ज ने चवन्नी नहीं दी थी। इसे बनवाने में यहां के ताल्लुकेदारों, महाराजा बलरामपुर और मेरे पूर्वजों ने योगदान दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं और डॉक्टरों से कहा कि वह जनता के दर्द को समझें और जनसेवा को नारायण सेवा मानकर सेवा करें।

190 रोबोटिक सर्जरी, 65 ट्रांसप्लांट : सोनिया नित्यानंद
कुलपति सोनिया नित्यानंद ने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय तक लगभग 190 रोबोटिक सर्जरी हो चुकी है। 65 ट्रांसप्लांट हुए हैं। इनमें लिवर 46, रीनल 19 शामिल हैं। अगला लक्ष्य हार्ट और लंग्स ट्रांसप्लांट शुरू करना है। एक्स्ट्रा म्यूरल ग्रांट जो 3 साल पहले 25 करोड़ थी, आज 35 करोड़ हो गई है। एआई इनेबल्ड सीटी मशीन लगा दी है। ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी पर मल्टी सेंटर रिसर्च सेंटर बनाया गया है। शताब्दी फेज-1 और फेज-2 हॉस्पिटल का एनएबीएच एक्रेडिशन भी कराया जा रहा है। कुलाधिपति के निर्देश पर 4 एमिनींट फैकल्टी और 4 स्पेशल अवॉर्ड भी दिए जा रहे हैं।
डॉ. शालिनी त्रिपाठी को फैकल्टी अप्रिसिएशन अवार्ड
केजीएमयू की बाल रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर शालिनी त्रिपाठी को एनआईसीयू में मिल्क बैंक रन करने के लिए फैकल्टी अप्रिसिएशन अवार्ड मिला है। डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि हम लोग मिल्क बैंक चला रहे हैं। इसमें मांओं से दूध डोनेट कराकर पाश्चुराइज करके उसे प्रीमैच्योर नजवात शिशुओं को देते हैं। इससे शिशुओं की जान बचाई जा रही है। इसके अलावा हमारा स्टेट न्यू बॉर्न चाइल्ड सेंटर है, वह पूरे स्टेट के लिए सभी गाइडलाइंस के साथ चल रहा है।
चांसलर मेडल से नवाजे गये ऋषि सेठी
चांसलर मेडल पाने वाले डॉक्टर ऋषि सेठी एचओडी कॉर्डियोलॉजी ने कहा कि यह मेडल इसलिए स्पेशल है क्योंकि हम यहीं पढ़े और अब यहीं सेवा दे रहे हैं। इस तरह से यह हमारा परिवार हुआ। आज इसी फैमिली से सम्मान मिला है।
डॉ. गिरीश सिंह की पुस्तक का विमोचन
केजीएमयू के डॉ. गिरीश कुमार सिंह की लिखी ‘पुस्तक कहै कोऊ कितना करैय्या काऊ और हैं ‘ का विमोचन किया गया है। पुस्तक का विमोचन कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने किया।
डॉ. अमिय अग्रवाल व डॉ. प्रेमराज को मिला सम्मान
केजीएमयू में कार्यरत डॉक्टरों को भी अलग-अलग अवार्ड दिए गये। ट्रॉमा सेंटर इंचार्ज डॉ. प्रेम राज सिंह को भी अवार्ड मिला। डॉ. प्रेम राज सिंह के अलावा डॉ. अमिय अग्रवाल को भी सम्मानित किया गया। वहीं समारोह में नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम श्रीनिवास को चिकित्सा प्रशासन और स्वास्थ्य नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद विज्ञान वाचस्पति (डी. एससी) की उपाधि प्रदान की गई। हालांकि, निजी कारणों से वह समारोह में नहीं आ पाये। ऑनलाइन माध्यम से उन्हें मानद उपाधि प्रदान की गई।
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