प्रयागराज। AllahabadHighCourt ने मुस्लिम समाज से कुरूतियों निकाह, हलाला और तीन तलाक से जुड़े एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने सभी आरोपियों की याचिकाएं खारिज करते हुए मामले की विस्तृत जांच जारी रखने का आदेश दिया। जज ने एक संवेदनशील मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि महिलाओं के यौन शोषण को व्यक्तिगत कानूनों या धार्मिक प्रथाओं की आड़ में किसी भी हालत में संरक्षण नहीं दिया जा सकता, अदालत ने कहा कि अगर किसी महिला या नाबालिग के साथ अपराध किया जाता है तो उसके खिलाफ भारतीय आपराधिक कानून पूरी तरह लागू होंगे और व्यक्तिगत कानूनों का सहारा लेकर अपराध से बचा नहीं जा सकता। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की बेंच ने पीड़िता के पूर्व पति, उसके रिश्तेदारों और एक मौलाना समेत नौ आरोपियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया. इन याचिकाओं में FIR रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने आरोपों को गंभीर मानते हुए जांच जारी रखने का निर्देश दिया।
ये मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले दर्ज मुकदमे के अनुसार 2015 एक नाबालिग का निकाह कराया गया था, आरोप है कि 2016 में उसे तीन तलाक दिया गया और बाद में निकाह हलाला के नाम पर उसके साथ दुष्कर्म किया गया, इसके बाद दोबारा निकाह हुआ, लेकिन कुछ सालों बाद फिर तलाक दे दिया गया। बाद में कथित तौर पर दोबारा हलाला के नाम पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया, हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई नाबालिग लड़की हलाला के नाम पर यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर की जाती है, तो ऐसा मामला सीधे तौर पर पॉक्सो (POCSO) कानून और बाकी आपराधिक धाराओं के दायरे में आएगा, अदालत ने साफ किया कि जब आपराधिक कानून लागू होता है, तब व्यक्तिगत कानूनों की दलील देकर अपराध को सही नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने ये भी कहा कि सामने आए तथ्यों से गंभीर अपराध का संकेत मिलता है, ऐसे मामलों में शुरुआती चरण में FIR रद्द करना सही नहीं होगा, क्योंकि इससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए सभी आरोपों की गहन जांच जरूरी है। इस फैसले को महिलाओं की सुरक्षा और उनके संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हाईकोर्ट ने दोहराया कि संविधान में समानता, गरिमा और कानून के समक्ष समान संरक्षण का अधिकार सर्वोपरि है तथा किसी भी धार्मिक या व्यक्तिगत प्रथा के नाम पर महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को मंजूर नहीं किया जा सकता।
DhirendraShastri बोले, चढ़ावा चोरी पाप नहीं महापाप है,कानून के साथ ही भगवान भी देंगे सजा
