आस्था पर डाका: SIT जांच में दावा, दान में मिली रकम की चोरी से किसी की 50 तो किसी की 100 गुना बढ़ी संपत्ति

Plunder of faith: SIT probe claims that theft of donation money caused some individuals' assets to swell 50 to 100-fold.

किसी ने जमीन, प्लॉट आदि खरीदे तो किसी ने हॉस्टल आदि का निर्माण कराया। खासकर ये संपत्तियां मंदिर से जुड़ने के बाद बनाई गईं।

अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या में 500 साल बाद बने प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के दौरान मिले चंदे और मंदिर निर्माण के बाद आई चढ़ावा की राशि से लूट करने वाले कई लोगों की संपत्ति इतनी बढ़ गई है कि एसआईटी वाले भी हैरान है। SIT कि जांच में सामने आया कि मंदिर की नौकरी लगने के बाद कईयों की हैसियत 50 से लेकर 100 गुना तक बढ़ी पाई गई। बता दें कि आरोपियों के अलावा ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भी संपत्तियां अचानक बढ़ी हैं। इन सभी की जांच अब एसआईटी कर रहीं है। एसआईटी ने जो रिपोर्ट तैयार की, उसमें सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है, जिससे आरोपियों की पहचान की गई है। वहीं, एसआईटी ने सभी आरोपियों की संपत्तियों की भी जानकारी जुटाई है, जिसमें टिन्नू, अनुकल्प, लवकुश और सुभाष की हैसियत से अधिक संपत्ति मिली। वहीं, उनकी लाइफस्टाइल में भी पूरी तरह बदलाव आया। जिसके पुख्ता सुबूत मिले हैं। टिन्नू व कुछ ट्रस्ट के पदाधिकारियों की संपत्ति 100 गुना तक बढ़ी। किसी ने जमीन, प्लॉट आदि खरीदे तो किसी ने हॉस्टल आदि का निर्माण कराया। खासकर ये संपत्तियां मंदिर से जुड़ने के बाद बनाई गईं। इससे स्पष्ट है कि गबन में उनकी बड़ी भूमिका रही।

एंसआईटी जांच में पता चला कि मंदिर प्रबंधन ने जिन कर्मचारियों को नौकरी पर रखा, उनका पुलिस सत्यापन तक नहीं कराया जाता था। ये सीधे तौर पर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी जांच में इस तथ्य को गंभीरता से शामिल किया है। इसमें सुधार के निर्देश दिए गए हैं।राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था बेहद अहम है। यह देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक है। यही वजह है कि कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था है। जब एसआईटी ने जांच की तो पता चला कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति मंदिर प्रबंधन ने की, उनका किसी तरह का पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया। अधिकतर कर्मियों की भर्ती ट्रस्ट के पदाधिकारियों व उनके करीबियों के माध्यम से होती थी। ये सभी लोग उनकी सिफारिश पर भर्ती होते गए। इसलिए न कोई जांच-पड़ताल हुई। बस भर्ती हुई और सैलरी मिलने लगी।

रकम बंटवारे पर खुला भेद

एसआईटी की अब तक की जांच में यही सामने आया है कि आरोपियों में आपस में ही रकम के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ, जो बढ़ गया। किसी ने शिकायत की तो मामला उजागर हो गया। चूंकि मामला मंदिर से जुड़ा था, इसलिए ट्रस्ट के पदाधिकारी इसे दबाने में जुट गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ महीने पहले अनुकल्प मिश्र ने गांव में कथा का आयोजन किया था। एसआईटी ने जांच में जो तथ्य जुटाए, उसके मुताबिक कथा में आठ से दस लाख रुपये खर्च किए गए। 500 महिलाओं को साड़ियां बांटी गईं, जबकि उसकी सैलरी 18-20 हजार रुपये थी। इतनी सैलरी में इतना बड़ा आयोजन सवाल खड़ा करता है। यह सब आयोजन गबन की राशि से किया गया।

मंदिर परिसर में करीब 800 कर्मी

राम मंदिर परिसर में करीब 800 ऐसे कर्मचारी हैं, जिनकी भर्ती मंदिर प्रबंधन ने की है। इसमें 200 कर्मी ट्रस्ट ने खुद अपने स्तर पर नौकरी पर रखे हैं। इन का पुलिस सत्यापन तक नहीं कराया गया। अमूमन किसी भी नौकरी में आवेदन के लिए पुलिस सत्यापन कराया जाता है, जिससे उसके बारे में जानकारी मिल सके। लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। उसकी वजह ट्रस्ट के पदाधिकारियों की हनक थी। जो वे चाहते थे, वैसा होता था। कोई सवाल खड़ा करने वाला तक नहीं था।

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