लखनऊ। Conflicted Relief : सुप्रीम कोर्ट ने देश के शिक्षकों के लिए सख्त फैसला सुनाया,उन्हें अब हर हाल में एक साल के भीतर टीईटी पास करनी होगी। इसके बाद ही वह कक्षा एक से लेकर आठ तक छात्रों को पढ़ाने के योग्य होंगे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को टीईटी से छूट देने से मना कर दिया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने शुक्रवार को इस बारे में समीक्षा याचिकाओं पर दिए फैसले में टीईटी की अनिवार्यता को बरकरार रखा। पीठ ने कहा, ऐसा कोई तथ्य नहीं रखा गया है जिसके कारण मूल आदेश में किसी प्रकार की समीक्षा की जाए। कोर्ट ने कहा, समीक्षा याचिकाकर्ता को राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा की निरंतरता के महत्व को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का प्रयोग करते हुए कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी पास करने की समय एक साल बढ़ा दी।
साल में दो बार कराई जाए टीईटी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि टीईटी नियमित रूप से कराई जाए और संभव हो तो साल में दो बार परीक्षा कराई जाए, ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में समयसीमा बढ़ाने की कोई और मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। मालूम हो कि परंपरा से हटकर सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई की थी। 13 मई को सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सितंबर, 2025 में जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने टीईटी की अनिवार्यता का फैसला दिया था। इस फैसले से देश भर के लाखों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। यह दावा किया जा रहा है कि कई शिक्षकों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। सितंबर के फैसले में कहा गया था कि कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए, जिनकी नौकरी पांच वर्ष से ज्यादा बची है, दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। जिनकी नौकरी पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें भी अगर प्रोन्नति पानी है तो टीईटी पास करना अनिवार्य है। उस फैसले के खिलाफ करीब सवा दो सौ से अधिक समीक्षा या पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थी।
शिक्षक कर रहे हैं लगातार संघर्ष
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को दिए गए निर्णय से प्रदेश के शिक्षकों में काफी मायूसी है। वहीं इस निर्णय से असंतुष्ट शिक्षकों ने इस मामले में सड़क से संसद तक अब आर-पार की लड़ाई लड़ने की बात कही है। टीईटी मामले में प्रदेश के 1.86 लाख से अधिक और देश भर में 22 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित होंगे। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षक समाज को काफी झटका लगा है। हम इस मामले में हार नहीं मानेंगे और अधिवक्ताओं से राय लेकर इसमें क्यूरेटिव पिटीशन डालेंगे। उन्होंने कहा कि सड़क पर भी आंदोलन दोबारा शुरू करेंगे। केंद्र सरकार से भी कहेंगे कि यह सही नहीं है। शिक्षकों को राहत दी जाए।
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