लखनऊ। Toxic Air देश की राजधानी के बाद अब यूपी की राजधानी लखनऊ अब तेजी से बढ़ते प्रदूषण की चपेट में आ रही है। स्विट्जरलैंड की एयर क्वालिटी एजेंसी आईक्यू एअर (IQAir) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में लखनऊ को दुनिया का 58वां सबसे प्रदूषित शहर बताया गया है। देश के 259 शहरों में इसकी रैंकिंग 34वीं है।सबसे चिंताजनक बात यह है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में 64 भारत के हैं। इनमें भी यूपी के 11 शहर शामिल हैं। यह रिपोर्ट 143 देशों के 9,446 शहरों और कस्बों के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें 40 हजार से अधिक मॉनिटरिंग स्टेशनों के डेटा का विश्लेषण किया गया।
फेफड़ों के लिए खतरनाक
लखनऊ में सालाना औसत पीएम 2.5 स्तर 54.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की तय सुरक्षित सीमा से करीब 10 गुना अधिक है। ये पीएम 2.5 बेहद सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों और खून तक पहुंच जाते हैं, जिससे अस्थमा, सांस की बीमारियां, दिल का दौरा, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर इसका असर ज्यादा गंभीर होता है।
लोनी शहर पहले स्थान पर
इसके साथ ही दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में यूपी के गाजियाबाद जिले का लोनी पहले स्थान पर है। जबकि चीन का होतान और भारत की दिल्ली क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। इसके अलावा गाजियाबाद, उल्हासनगर और अन्य शहर भी इस सूची में शामिल हैं। देश स्तर पर भारत सातवें स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश सबसे अधिक प्रदूषित देशों में शीर्ष पर हैं। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि धूल भरी सड़कें, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य और कचरे का सही प्रबंधन न होना प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। सड़क सफाई, कचरा जलाने पर रोक, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और वाहनों की नियमित जांच जैसे उपाय ही राहत दे सकते हैं।
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