महिलाओं को अपने मौलिक अधिकारों के बारे में जागरूक होना चाहिए

Women should be aware of their fundamental rights.

किशोरियों, महिलाओं और समुदाय के सदस्यों ने इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया।

लखनऊ। Women Awareness अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यूपी को एलिशन टू एम्पावर गर्ल्स (UPCEG) एक सदस्य अमलतास ने बाराबंकी के मसौली ब्लाक के आदमपुर गांव में सशक्त नारी- सशक्त समाज अभियान के तहत एक सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों लैंगिक समानता और समाज में महिलाओं को सशक्त बनाने के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना था। किशोरियों, महिलाओं और समुदाय के सदस्यों ने इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने विचार व अनुभव साझा किए, जिससे यह कार्यक्रम बेहद संवादात्मक और सार्थक बन गया।

महिलाओं के संघर्ष का प्रतीक

कोमल पटेल ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व पर एक विस्तृत सत्र आयोजित किया। उन्होंने इस बात की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि समझाया कि विश्व स्तर पर क्यों मनाया जाता है और यह समान अधिकारों व पहचान के लिए महिलाओं के संघर्ष का प्रतीक कैसे है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि महिलाओं को अपने मौलिक अधिकारों के बारे में जागरूक होना चाहिए, जिनमें शिक्षा, सुरक्षा, गरिमा और समान अवसरों का अधिकार शामिल है। उन्होंने प्रतिभागियों को भेदभाव और अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाने तथा अपने परिवारों व समुदायों के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

सोच-समझकर निर्णय लेने की क्षमता

सुलेखा वर्मा ने महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के महत्व पर एक आकर्षक सत्र का नेतृत्व किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि शिक्षा महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक है। क्योंकि यह उन्हें स्वतंत्र, आत्मविश्वासी और सोच-समझकर निर्णय लेने में सक्षम बनने में मदद करती है। उन्होंने महिलाओं और किशोरियों को अपनी शिक्षा जारी रखने तथा ऐसे कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकें, साथ ही उन्होंने परिवार और समुदाय के सहयोग के महत्व पर भी ज़ोर दिया।विजय पाल ने महिलाओं को सहयोग देने में समाज की भूमिका पर प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि महिला सशक्तिकरण के लिए परिवारों और समुदायों की सामूहिक ज़िम्मेदारी आवश्यक है। उन्होंने एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण बनाने के महत्व पर प्रकाश डाला और पुरुषों को समानता प्राप्त करने में महिलाओं का सक्रिय रूप से समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

अधिकारों के प्रति जागरूक किया

अजय शर्मा ने महिलाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाओं और सहायता प्रणालियों पर एक जानकारीपूर्ण सत्र आयोजित किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के बारे में समझाया और प्रतिभागियों को इन लाभों तक पहुंचने के तरीके के बारे में चर्चा की। रूबी खान ने महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता पर एक सत्र आयोजित किया। उन्होंने घरेलू हिंसा, भेदभाव और अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को कानूनी अधिकारों, हेल्पलाइन और सहायता प्रणालियों के बारे में जानकारी दी और महिलाओं को मदद लेने तथा अपनी गरिमा के लिए मज़बूती से खड़े होने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस कार्यक्रम में जागरूकता, चर्चा और अनुभवों का आदान-प्रदान शामिल था। जिससे प्रतिभागियों में आत्मविश्वास और जागरूकता बढ़ी, विशेषकर किशोरी बालिकाओं में। कार्यक्रम में किशोरी बालिकओं के घर वालों, विशेषकर माताओं ने भी भाग लिया। उनका कहना था कि कार्यक्रम ने सकारात्मक रूप से बहुत उपयोगी रहा। इस कार्यक्रम में किशोरी बालिकाओं सहित लगभग 100 लोगों ने भाग लिया।

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