लखनऊ। BSP on Mission 2027 राजनीतिक अस्तीत्व की लड़ाई लड़ रही बसपा के लिए विधानसभा चुनाव करो या मरो की स्थिति का है,क्योंकि उसे सत्ता से बाहर हुए 14 साल हो गए। अगर 2027 के चुनाव में वापसी नहीं कर पाई तो उसके लिए खतरनाक साबित होगा। इसलिए बसपा सुप्रीमों ने अगले विधानसभा चुनाव में वापसी के लिए सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर आगे बढ़ रही हैं। यूजीसी बिल पर भाजपा सरकार से नाराज चल रहे ब्राहृमणों को साथ लाने के लिए बड़ा एलान कर दिया। मायावती ने कहा कि आगामाी विधान सभा चुनाव में प्रदेश की 80 सीटों पर ब्राहृमण उम्मीदवारों को मौका देंगी। इसी क्रम में उन्होंने जालौन की माधौगढ़ सीट से आशीष पांडेय को प्रत्याशी घोषित कर दिया। बसपा अपने इसी दाव से यूपी में बड़ा उलटफेर करना चाह रही है। सूत्रों की मानें तो बसपा जून तक करीब 50 टिकट ब्राह्मण उम्मीदवारों के तय कर देगी।
2007 के फार्मूले पर बसपा
बता दें कि बसपा ने इसी फार्मूले के दम पर 2007 में यूपी की सत्ता पर कब्जा किया था। इसके बाद हुए चुनावों में लगातार उसका प्रदर्शन गिरता गया। नतीजा यह हुआ कि इस समय यूपी विधानसभा में मात्र एक बसपा विधायक बचे है। मायावती के निर्देश पर केंद्रीय संयोजक आकाश आनंद अप्रैल के अंत से अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर सकते हैं। जिन सीटों पर पहले प्रत्याशियों के नाम घोषित हो जाएंगे वहां आकाश रोड शो और जनसभाएं करेंगे। वहीं, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने के बाद पार्टी के तमाम पदाधिकारी यूपी आकर आकाश की मदद करेंगे। खासकर आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ, जयप्रकाश, रामजी गौतम व अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद यूपी का रुख करेंगे। इससे पहले आकाश भी चुनावी राज्यों का दौरा करेंगे। इससे पहले आकाश 15 मार्च को पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती पर राजस्थान के भरतपुर में रैली करेंगे।
सपा की उम्मीदों पर फिरेगा पानी
बसपा की तरह ही सपा भी सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही है। योगी सरकार को हर मौके पर घेरने वाली सपा ने पीडीए फार्मूले के दम पर 2024 के लोकसभा चुनाव में तगड़ा झटका देते हुए उसकी सीटों को आधी कर दिया था। अब सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव उसी सूत्र के भरोसे विधानसभा चुनाव में चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे है। इसके उलट कांग्रेस, आप और एआईएमआईएम भी यूपी चुनाव पूरी दमदारी से लड़ने की तैयारी में है। एक तरफ बसपा ब्राहृमणों को रिझाने में जुटी है तो सपा नसीमुददीन सिददीकीय के दम पर मुस्लमानों को अपने पाले में करने की जुगत में है। इन सब के विपरित भाजपा जातिय भेदभाव को समाप्त करने के इरादे से मैदान में उतरने की तैयारी में है।
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