बांदा। Sexual abuse of children बच्चों के यौनशोषण और उनकी तस्वीरे और फोटो इंटरनेट पर बेचने के मामले में विशेष न्यायधीश पॉक्सो प्रदीप कुमार मिश्रा ने सिंचाई विभाग के जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मरते दम तक फांसी पर लटकाने की सजा सुनाई। जज ने अपने 163 पेज के विस्तृत फैसले में इस घिनौने अपराध को लेकर कड़ी टिप्पणियां भी कीं। इसी मामले के दिल्ली निवासी तीसरे आरोपित की फाइल को अलग कर दी गई है। उस पर ई-मेल के माध्यम से जानकारी साझा करने का आरोप है। जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर है।
बता दें कि नवंबर 2020 में मामला उस समय सामने आया जब सीबीआई ने जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को गिरफ्तार कर जेल भेजा। सीबीआई ने 31 अक्तूबर 2020 को नई दिल्ली में इसकी प्राथमिकी दर्ज की थी। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त सूचना के आधार पर यह खुलासा हुआ था कि यूपी के बांदा जिले के जवाहर नगर नारायणी कस्बा, नरैनी निवासी चुन्ना प्रसाद कुशवाहा के पुत्र जेई रामभवन, कई अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर बांदा, चित्रकूट और आसपास के इलाकों के बच्चों का यौन शोषण कर रहा है। जांच में पता चला कि रामभवन और उसके साथी इन घिनौने कृत्यों के दौरान बच्चों की तस्वीरें और वीडियो भी बनाते थे।
इंटरनेट पर मिले थे अश्वलील वीडियो और तस्वीरें
यह भी सामने आया कि रामभवन और अन्य लोग इस अश्लील सामग्री को इंटरनेट पर प्रकाशित और प्रसारित कर रहे हैं। बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर व आसपास के इलाकों से इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से बच्चों के कई अश्लील वीडियो और तस्वीरें इंटरनेट पर पाए गए। इन बच्चों का इस्तेमाल अश्लील तस्वीरें प्रकाशित करने, अप्राकृतिक अपराध करने और पेन ड्राइव के माध्यम से यौन शोषण की तस्वीरें व वीडियो भेजने के लिए किया जा रहा था। इनसे मिली पेन ड्राइव में 34 वीडियो और 679 तस्वीरें मिली थीं।रामभवन और उसके साथी डार्कवेब और अन्य सोशल साइट्स, वीडियो प्लेटफॉर्म व वेबसाइटों पर बाल यौन शोषण से संबंधित तस्वीरें और वीडियो बेच रहे थे। जेई रामभवन इसके लिए अपने तीन मोबाइल नंबरों का उपयोग कर रहा था, जबकि वह और अन्य व्यक्ति इंटरनेट डार्क वेब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री प्रकाशित/प्रसारित करने के लिए तीन ईमेल आईडी का उपयोग कर रहे थे।
74 गवाहों को अदालत में किया गया पेश
मामले की विवेचना सीबीआई के सेवानिवृत्त अपर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने की और उन्होंने आरोप पत्र पेश किया। मामले में पांच जून 2023 से शुरू होकर 74 गवाहों को अदालत में पेश किया गया। जिनमें 25 पीड़ित बच्चे और अन्य गवाह शामिल थे। सीबीआई के अधिवक्ता अभियोजन दारा सिंह मीना और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद, न्यायाधीश ने अपने 163 पृष्ठों के फैसले में सजा सुनाई। आरोपी की पत्नी दुर्गावती को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी लेकिन 18 फरवरी 2026 को उसे इस मामले में दोषी पाते हुए पुनः जेल भेज दिया गया था। आज, दोनों अभियुक्तों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां फैसला सुनाए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
तीन साल के बच्चों को भी नहीं छोड़ा
सीबीआई के सामने जब यह मामला आया तो जांच में पता चला आरोपियों ने 33 ज्यादा मासूमों को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया था। इन बच्चों की उम्र 3 से 16 साल के बीच थी। जांच में पता चला कि कुछ पीड़ितों के प्राइवेट पार्ट्स पर पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट के दौरान चोटें भी आई थीं। आरोपी रामभवन सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा था. आरोपी गरीब बच्चों को ज्यादातर शिकार बनाते थे। वह इन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते थे, जिसमें ऑनलाइन वीडियो-गेम खिलाने का लालच देना, पैसे, गिफ्ट देना आदि शामिल था। आरोपित कुकर्म और दुष्कर्म करता था, जबकि उसकी पत्नी बच्चों से संबंध बनाती थी।
हर बच्चे को 10-10 लाख की क्षतिपूर्ति
अदालत ने रामभवन को अलग-अलग धाराओं में दोषी पाते हुए 6.45 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है, जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती पर 5.40 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माने की धनराशि में से पीड़ित बच्चों में से (जिन्होंने अदालत में उपस्थित होकर गवाही दी) प्रत्येक को 10-10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, रामभवन के पास से बरामद आठ लाख रुपये सरकार जब्त करेगी और उस पर लगे ब्याज की धनराशि भी पीड़ित बच्चों में बराबर-बराबर वितरित की जाएगी।
