भगवा दल का विक्टरी कार्ड: 2027 में​ पिछड़ों को साधने के लिएPankaj Chaudhary को बनाया अध्यक्ष

BJP President says no to caste politics in UP, gives a strong message to MLAs and leaders

प्रदेश अध्यक्ष ने जनप्रतिनिधियों से कहा है कि ऐसी गतिविधियों से गलत संदेश जाएगा।

लखनऊ। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के लिए राजनीतिक दलों ने अभी से बिछात बिछाने लगे है। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने ​पीडीए मतदाताओं के सहारे भाजपा को तगड़ा ​झटका दिया था। इसी का तोड़ खोजने के लिए भगवा दल ने प्रदेश के सबसे बड़े मतदाता वर्ग कुर्मी बिरादरी को साधने लिए सात बार के सांसद और केंद्रीय मंत्री Pankaj Chaudhary को प्रदेश का नया अध्यक्ष चुना है।

काफी विचार—विमर्श के बाद भाजपा ने पूर्वांचल के कद्दावर नेता और सात बार के सांसद व केंद्रीय मंत्री Pankaj Chaudhary पर दांव ऐसे नहीं लगाया है। इसके पीछे कई सियासी कारण हैं। पंकज चौधरी को मुखिया बनाकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पिछड़ों को साधने के साथ ही विपक्ष के पीडीए समीकरण में सेंध लगाने की कोशिश की है। भाजपा ने पंकज चौधरी के सहारे अपने परंपरागत कुर्मी वोट को भी साथ रखने का प्रयास किया है। साथ ही कार्यकर्ताओं को यह भी संदेश दिया है कि भाजपा अपने मूल काडर की कीमत को भूलती नहीं है।

कोर वोट को साधने की कोशिश

प्रदेश में यादवों के बाद पिछड़ों में सबसे अधिक प्रभावशाली रही कुर्मी बिरादरी भाजपा का कोर वोट बैंक रही है। बता दें पार्टी में तमाम कुर्मी नेताओं के होने और अपना दल (एस) के साथ होने के बाद भी 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा कुर्मी वोट बैंक में भारी सेंधमारी करने में सफल रही है। इसके कारण भाजपा को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी और 2019 में 62 लोकसभा सीट जीतने वाली भाजपा 2024 में 36 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। तभी से पार्टी नेतृत्व इस नुकसान की भरपाई के लिए एक ऐसे चेहरे को तलाश रहा था, जो कुर्मी वोट बैंक को फिर से अपने पाले में कर पाए।

पंकज चौधरी पर दांव लगाने की एक खास वजह यह भी मानी जा रही है कि मौजूदा सियासी परिदृश्य में यूपी में कुर्मी चेहरे के तौर पर मूल काडर के सिर्फ दो ही बड़े कुर्मी नेता हैं। इनमें एक खुद पंकज चौधरी और दूसरे जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह। हालांकि प्रदेश सरकार में वैसे तो कई अन्य कुर्मी नेता मंत्री और विधायक हैं, जिनमें से अधिकांश या तो दूसरे दलों से आए हैं या मूल काडर का होने के बावजूद कुर्मी समाज में उतने प्रभावी नहीं हैं, जितने पंकज चौधरी।

बड़े नेताओं के बाद भी खिसका वोट बैंक

लोकसभा चुनाव में अनुप्रिया पटेल जैसा बड़ा कुर्मी चेहरा होने के अलावा पार्टी के भीतर करीब दो दर्जन से अधिक कुर्मी विधायकों और तमाम राज्य व क्षेत्रीय स्तर पर संगठन के तमाम पटेल नेताओं के होते हुए पार्टी का भारी कुर्मी वोट बैंक खिसक गया था। पार्टी के मंथन में देखा गया कि लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र के कुर्मी बहुल मड़िहान और चुनार विधानसभा क्षेत्र में कुर्मी वोट एनडीए से छिटका था। मड़िहान में तो भारी नुकसान हुआ था। वहीं, वाराणसी संसदीय क्षेत्र में रोहनियां और सेवापुरी जैसे कुर्मी बहुल विधानसभा क्षेत्र के साथ ही अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी कुर्मी वोट घटने से पीएम मोदी की जीत का अंतर घट गया था। इ​सलिए शीर्ष नेतृत्व ने कुर्मी बिरादरी के वरिष्ठ नेताPankaj Chaudhary को भगवा दल का मुखिया बनाकर एक तीर से कई निशाने लगाए है।

Municipal Elections भाजपा ने दक्षिण भारत में रखा मजबूत कदम, 45 साल बाद वाम किला ढहा, खिला कमल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Community unites against child labour, holds awareness rally. ‘राम’ बनकर छाए रणबीर कपूर Play Holi with herbal colours Shreya Sharma’s new avatar in ‘Mr. and Mrs. Grey’ भारत की चैंपियन बेटियां