लखनऊ।Unique case of divorce यूपी की राजधानी लखनऊ से तलाक का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां शादी के 50 साल बाद एक 75 साल के पति ने अपनी 65 साल की पत्नी को तलाक दिया। बता दें 1975 में गुरुप्रसाद और रमदेई का विवाह हुआ था। मनमुटाव के बाद 1990 से दोनों अलग रह रहे थे। 2009 से परिवार न्यायालय में वाद चल रहा था। इन दोनों के बीच लंबे समय तक पारिवारिक न्यायालय में वाद चला। न्यायालय की ओर से दोनों पक्षों को साथ रहने के लिए रजामंद करने की भरसक कोशिश की गई, लेकिन सभी कोशिशें नाकाम साबित हुईं।
काकोरी के ग्राम कटौली के निवासी गुरुप्रसाद और मलिहाबाद के ग्राम ईशापुर की निवासी रमदेई का विवाह 1975 में हुआ था। शादी के कुछ साल तक सब कुछ ठीक-ठाक चला, लेकिन बाद में छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई होने लगी। 14 साल तक साथ रहने के बाद भी दोनों को कोई संतान नहीं हुई।
1990 से अलग रह रहे थे दोनों
दांपत्य रुपी गाड़ी सही ढंग से नहीं चलने से 1990 से रमदेई मायके में रहने लगीं। दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहा। यह मामला 2009 में पारिवारिक न्यायालय पहुंचा। दोनों पक्ष साथ रहने के लिए राजी नहीं हुए। 26 मार्च 2025 को न्यायालय अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह विच्छेद का निर्णय सुनाया। गुरुप्रसाद ने बताया उन्होंने कई बार रमदेई को साथ रखने की सहमति दी, लेकिन उनकी तरफ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। वहीं, रमदेई और उनके भाई का कहना है कि 1990 के बाद से कभी भी गुरुप्रसाद ने उन्हें साथ रखने की बात नहीं की।
गुजारा भत्ता दिलाने की मांग
रमदेई का कहना है कि इतने वर्षों से मैं अपने भाई के पास रह रही हूं। बुढ़ापे का कोई सहारा भी नहीं है। आर्थिक रूप से कोई मदद भी नहीं मिली। गुजारा भत्ता भी कुछ समय ही मिला। अब तो पूरी उम्र गुजर गई, भला किससे गुहार लगाऊं। रमदेई के भाई बालकराम ने बताया गुरुप्रसाद ने मेरी बहन को अपनी जायदाद में से कुछ भी नहीं दिया। गुजारा भत्ता भी कुछ माह ही मिला। भाई ने कहा कि गुरुप्रसाद के पास कई बीघा जमीन है, लेकिन उन्होंने उसमें से भी मेरी बहन को कुछ नहीं दिया। बालकराम ने कहा कि हम लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं, लेकिन एक बार फिर से न्यायालय से गुजारा भत्ता के लिए गुहार जरूर लगाएंगे।
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