80 प्रति​भागियों में से आर्टिलस ने शानदार प्रदर्शन के बल पर जीता रॉश दृष्टि Health-tech Challenge

Artilus won the Roche Vision Health-tech Challenge, thanks to a stellar performance among 80 participants.

इस चैलेंज का निर्णय करने वाली ज्यूरी में स्वास्थ्यसेवा क्षेत्र के विशेषज्ञ, स्टार्टअप मेंटर और रॉश इंडिया की लीडरशिप से जुड़े प्रमुख लोग शामिल रहे।

  • स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम के तहत डीपीआईआईटी और रॉश फार्मा इंडिया की संयुक्त पहल है दृष्टि हेल्थटेक चैलेंज

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली:Health-tech Challenge: हेल्थकेयर सेक्टर की अग्रणी स्टार्टअप फर्म आर्टिलस को स्टार्टअप इंडिया के दृष्टि हेल्थटेक चैलेंज का विजेता चुना गया है। आर्टिलस एक एआई-आधारित हेल्थटेक सॉल्युशन प्रदाता कंपनी है, जिसका लक्ष्य मरीजों के इलाज के बेहतर नतीजे पाने के लिए जांच एवं इलाज को सुगम बनाना है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और रॉश फार्मा इंडिया की संयुक्त पहल के रूप में इस हेल्थटेक चैलेंज को आयोजित किया गया। इस चैलेंज का विजेता बनना भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में व्यापक बदलाव ला रहे घरेलू हेल्थ टेक स्टार्टअप्स की तेज प्रगति का प्रमाण है।भारत में स्वास्थ्य से संबंधित कुछ प्रमुख चुनौतियों का सामना करने के लिए ट्रांसफॉर्मेटिव (परिवर्तनकारी) और स्केलेबल (विस्तार के योग्य) समाधान विकसित करने के लिए हेल्थटेक स्टार्टअप्स की पहचान करने और उनका समर्थन करने के लक्ष्य के साथ आयोजित दृष्टि हेल्थटेक चैलेंज को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। इसके लिए डिजिटल हेल्थ सेक्टर में काम कर रहे 80 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने आवेदन किया था।

हेल्थकेयर इकोसिस्टम को मजबूती देना लक्ष्य

इस चैलेंज का निर्णय करने वाली ज्यूरी में स्वास्थ्यसेवा क्षेत्र के विशेषज्ञ, स्टार्टअप मेंटर और रॉश इंडिया की लीडरशिप से जुड़े प्रमुख लोग शामिल रहे। ज्यूरी ने सख्त और कई चरणों वाली मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से आवेदनों की समीक्षा की। इसमें समस्या की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता, बाजार के दृष्टिकोण से तैयारी, नेतृत्व की विश्वसनीयता और नियामकीय, वैधानिक एवं बौद्धिक संपदा कानूनों के अनुपालन जैसे मानकों पर फोकस किया गया। आर्टिलस इस चैलेंज में विजेता के रूप में सामने आई। इसे अपने सॉल्युशन को रॉश फार्मा इंडिया के साथ मिलकर विकसित करने और आगे बढ़ाने के लिए 35 लाख रुपये का वित्तीय अनुदान मिलेगा।

पुरस्कार समारोह का आयोजन नई दिल्ली स्थित स्विस दूतावास में किया गया। इस दौरान भारत एवं भूटान में स्विट्जरलैंड की राजदूत महामहिम श्रीमती माया टिसैफी उपस्थित रहीं। यह प्रतियोगिता इंडो-स्विस गठजोड़ की दिशा में एक अहम पड़ाव है। भारत में हेल्थकेयर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए स्टार्टअप इंडिया और डीपीआईआईटी के साथ साझेदारी में रॉश इंडिया ने इसका संचालन किया।

भारत एवं भूटान में स्विट्जरलैंड की राजदूत महामहिम श्रीमती माया टिसैफी ने कहा, ‘ईएफटीए और भारत के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते से दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते मजबूत हुए हैं। इसने एक ऐसा माहौल बनाया है, जिससे रॉश फार्मा इंडिया और स्टार्टअप इंडिया की इस पहल की तरह के विभिन्न इनोवेशन को गति मिली है। इसने उद्यमियों को मंच प्रदान किया है तथा मिलकर काम करने और वास्तविक प्रभाव सृजित करने के अवसरों को समर्थन दिया है। मैं इस प्रतियोगिता की विजेता स्टार्टअप फर्म आर्टिलस को बधाई देना चाहूंगी। इस स्टार्टअप के काम से दिखता है कि हेल्थटेक की मदद से जल्दी जांच को सुगम बनाया जा सकता है और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।’

सतत विकास की ओर अग्रसर

डीपीआईआईटी के अतिरिक्त सचिव अतीश कुमार सिंह ने कहा, ‘सतत आर्थिक विकास के लिए ऐसे इकोसिस्टम को बढ़ावा देना जरूरी है, जहां एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सुगमता के साथ जमीनी स्तर पर हेल्थकेयर डिलीवरी के साथ मिलकर काम कर सके। रॉश दृष्टि हेल्थटेक चैलेंज जैसी पहल से प्रभावी समाधान देने की भारतीय स्टार्टअप कम्युनिटी की व्यापक क्षमता सामने आई है। स्टार्टअप इंडिया, डीपीआईआईटी ऐसे ओपन इनोवेशन फ्रेमवर्क को सपोर्ट करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो घरेलू उद्यमियों को देशभर में अपने प्रभाव को विस्तार देने के लिए सशक्त करे।’रॉश फार्मा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ राजी मेहदवान ने कहा, ‘रेटिना से संबंधित बीमारियों के कारण पूरे भारत में कई लोगों की देखने की क्षमता खत्म हो जाती है। हेल्थकेयर सेक्टर में कई डॉक्टर हैं, जो लोगों की मदद कर रहे हैं और कई दवाएं हैं, जो वास्तव में बड़ा अंतर ला सकती हैं। लेकिन जो नहीं है, वह है सभी तब जल्दी जांच की सुविधा की उपलब्धता।

आर्टिलस ने इसका समाधान दिया है। इसकी ऑफलाइन एआई टेक्नोलॉजी से ऐसी जगहों पर भी स्क्रीनिंग की सुविधा मिल सकेगी, जहां पहले जांच संभव नहीं थी। इससे बड़े वर्ग तक जांच की सुविधा पहुंच सकेगी। इससे बड़ा बदलाव आएगा। किसी भी व्यक्ति को ऐसे किसी कारण से अपनी दृष्टि नहीं गंवानी पड़ेगी, जिससे बचाव संभव हैं। डीपीआईआईटी और स्टार्टअप इंडिया के साथ हमारी साझेदारी हेल्थकेयर सेक्टर की विशिष्ट चुनौतियों को दूर करने के लिए भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम का समर्थन करने, स्थानीय प्रतिभाओं को निखारने और घरेलू समाधानों को बढ़ावा देने के प्रति रॉश की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।’

विजेता समाधान के बारे में

डायबिटिक रेटिनोपैथी (डीआर) भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से बढ़ती हुई समस्या है। इसकी जांच में देरी होने से स्थायी रूप से आंख की रोशनी जा सकती है। दृष्टि हेल्थटेक चैलेंज को इस मामले में जांच की उपलब्धता की इसी कमी को दूर करने के लिए व्यापक टेक आधारित सॉल्युशन पाने के लिए लॉन्च किया गया था।आर्टिलस के इनोवेशन ‘दृष्टि’ (डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग) को इस चैलेंज में विजेता चुना गया है। यह इंस्टैंटेनियस, सीई क्लास 1 एआई प्रोडक्ट है, जिसने पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नॉस्टिक्स को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। अपनी तरह का अनूठा ‘एआई ऑन ए चिप’ विकसित करते हुए आर्टिलस ने पूरी तरह से ऑफलाइन रेटिनल स्क्रीनिंग संभव बनाया है। यह इंटरनेट या क्लाउड कनेक्टिविटी के बिना काम करता है। इसे आसानी से एक बैग में रखा जा सकता है और इसमें 5-जी इनेबल्ड ओसीटी सिस्टम हैं। अपनी खूबियों के साथ इस टेक ने भारत के दूरदराज के क्षेत्रों में व्यापक एवं पारदर्शी तरीके से रेटिनल डायग्नोसिस की सुविधा उपलब्ध कराते हुए हेल्थकेयर को ज्यादा लोकतांत्रिक बनाया है।

आर्टिलस के सह-संस्थापक एवं वीपी गिरीश सोमवंशी ने कहा, ‘इलाज की नई पद्धतियां तभी किसी की रोशनी बचा सकती हैं, जब मरीज को सही समय पर इलाज मिल जाए। रॉश दृष्टि हेल्थटेक चैलेंज ने इसी कमी को दूर करने की जरूरत को समझा। आर्टिलस में हम ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत और बाकी दुनिया में बड़े पैमाने पर मरीजों की समय पर पहचान हो, उन्हें सही जगह रेफर किया जाए, सही इलाज मिले और पूरा फॉलो-अप हो।’

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