बिजनेस डेस्क। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर भारत के अग्रणी महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा रूपान्तरण धातु, ऊर्जा एवं टेक्नोलॉजी सदन वेदांता (एनएसईः वीईडीएल) ने बताया कि पिछले 5 सालों के दौरान कंपनी की कौशल विकास पहलों के माध्यम से देश भर में तकरीबन 15 लाख लोगों को कुशल बनाया जा चुका है। अपने संचालन के आस-पास ग्रामीण समुदायों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए इन प्रोग्रामों ने अकुशल एवं अर्द्ध-कुशल युवाओं के बीच के अंतर को दूर किया है। भारत सरकार के कुशल भारत मिशन एवं कौशल भारत अभियान के अनुसार वेदांता के कौशल प्रयास ग्रामीण युवाओं को बाज़ार की ज़रूरतों के अनुसार कौशल और उद्यमिता के अवसर प्रदान कर उन्हें नौकरियां हासिल करने में मदद करते हैं तथा आजीविका के स्थायी अवसरों के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक मुख्यधारा में प्रवेश करने में सक्षम बनाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य
Vedanta के कौशल विकास प्रोग्राम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 8 (सभ्य कार्य एवं आर्थिक विकास) के अनुरूप हैं। इन प्रोग्रामों को अग्रणी प्रदाताओं के साथ साझेदारी में डिज़ाइन किया गया है। इनके द्वारा कंपनी का उद्देश्य 2030 तक 25 लाख लोगों को बेहतर कौशल के साथ सशक्त बनाना है। देश भर में फैले वेदांता के 200 से अधिक कौशल एवं प्रशिक्षण केन्द्र युवाओं को 40 से अधिक टेकनिकल एवं नॉन-टेकनिकल ट्रेड्स (जैसे सोलर टेकनिशियन, फोर्कलिफ्ट ऑपरेशन्स, हॉस्पिटेलिटी, सिलाई, फाइनैंस आदि) में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। कंपनी के कौशल केन्द्रों ने रु 15000 के औसत वेतन के साथ 91 फीसदी प्लेसमेन्ट रेट दर्ज की है।
कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के अनुसार 15-29 वर्ष के केवल 2 फीसदी लोगों को ही औपचारिक व्यवसायिक प्रशिक्षण मिलता है और 8 फीसदी लोग गैर-औपचारिक व्यवसायिक प्रशिक्षण हासिल कर पाते हैं। इसका अर्थ यह है कि इस आयु वर्ग में से कार्यबल में आने वाले बहुत कम लोग ही बाज़ार के अनुकूल कौशल में प्रशिक्षित होते हैं। इसके विपरीत अगर विकसित अर्थव्यवस्थाओं के आंकड़ों पर नज़र डालें तो कोरिया में 96 फीसदी, जर्मनी में 75 फीसदी, जापान में 80 फीसदी और यूके में 68 फीसदी लोग कार्यबल में प्रवेश करने से पहले प्रशिक्षित होते हैं।
भारत में सबसे ज़्यादा युवा आबादी
भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है, हमारे देश की 62 फीसदी आबादी की उम्र 15-59 वर्ष के बीच (कार्यशील वर्ग) है। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल बार-बार इस जनसांख्यिकी लाभांश का लाभ उठाने पर ज़ोर देते रहे हैं, अगले 25 सालों तक हम इस आयु वर्ग की क्षमता का लाभ उठा सकते हैं। हाल ही में अपने एक ट्वीट में अनिल अग्रवाल ने लिखा ‘‘दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत के पास सबसे ज़्यादा युवा आबादी है। दुनिया भर में आबादी की समीक्षा के अनुसार औसत भारतीय की उम्र 28.7 वर्ष है और 50 फीसदी इससे भी कम उम्र के हैं। यह हमारे लिए बहुत बड़ा फायदा है। तो आइए अपने युवाओं- महिलाओं एवं पुरूषों, लड़कों एवं लड़कियों में निवेश करें। ये दुनिया को पीछे छोड़ने की क्षमता रखते हैं।
Hinduja Foundation ने 15 राज्यों में 8 लाख से अधिक युवाओं को सशक्त बनाकर विश्व युवा कौशल दिवस मनाया
