- भारत के नए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को प्रक्षेपण से कक्षा में स्थापित होने तक जरूरी प्रणालियां उपलब्ध कराईं
- मौसम निगरानी, कृषि और पर्यावरण प्रबंधन की क्षमताओं को मिलेगा बढ़ावा
बिजनेस डेस्क,मुंबई: गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के एयरोस्पेस कारोबार ने इसरो के सफल EOS-05 मिशन में महत्वपूर्ण प्रणालियां उपलब्ध कराकर अहम योगदान दिया है। इन प्रणालियों ने उपग्रह को प्रक्षेपण से लेकर अंतरिक्ष में उसकी तय कक्षा तक पहुंचाने में मदद की। यह मिशन भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे अंतरिक्ष क्षेत्र में देश के बढ़ते औद्योगिक योगदान को भी मजबूती मिलती है।
EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को इसरो के GSLV-F17 रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह मौसम की जानकारी जुटाने, कृषि की बेहतर योजना बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और पर्यावरण की निगरानी जैसे कई महत्वपूर्ण कामों में मदद करेगा। इससे मिलने वाली जानकारी सरकार, विभिन्न एजेंसियों और स्थानीय समुदायों को बेहतर फैसले लेने में मदद कर सकती है। इससे देश के विकास और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों से निपटने की क्षमता भी मजबूत होगी।
लिक्विड प्रोपल्शन इंजन
गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप ने इसरो के GSLV-F17 मिशन के लिए रॉकेट और उपग्रह से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्रणालियों में योगदान दिया। इनमें विकास इंजन, क्रायोजेनिक इंजन के नोजल और उपग्रह के थ्रस्टर के महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं। इन प्रणालियों ने EOS-05 को रॉकेट के उड़ान भरने से लेकर उसकी तय कक्षा में पहुंचने तक की यात्रा में सहयोग दिया। गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के एयरोस्पेस बिजनेस हेड, माणेक बेहरामकामदीन ने कहा, “हर सफल अंतरिक्ष मिशन देश के लिए गर्व का क्षण होता है। हम चार दशक से भी ज्यादा समय से लिक्विड प्रोपल्शन इंजन और उपग्रहों के थ्रस्टर के महत्वपूर्ण हिस्से बनाकर भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान दे रहे हैं। यह इंजीनियरिंग उत्कृष्टता की ऐसी विरासत है, जो अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षाओं को लगातार आगे बढ़ा रही है।”
ऐतिहासिक मिशनों में योगदान
गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप ने इसरो के कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मिशनों में योगदान दिया है। वर्षों से कंपनी ने ऐसी तकनीक और क्षमताएं विकसित करने में मदद की है, जिन्होंने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत किया है। इससे भारतीय इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता भी सामने आई है।भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी भूमिका लगातार बढ़ा रहा है। ऐसे में EOS-05 मिशन यह दिखाता है कि नई सोच, आपसी सहयोग और आत्मनिर्भरता के दम पर देश क्या हासिल कर सकता है। यह मिशन भारतीय प्रतिभा, भारतीय तकनीक और भारतीय उद्योग की संयुक्त ताकत की कहानी भी है, जो पृथ्वी से आगे अंतरिक्ष में भारत की यात्रा को लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दे रही है।
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