Rustomji ने फोर्ट में मुंबई के आइकॉनिक वाडिया क्‍लॉक टावर का पुनरुद्धार किया

Rustomji restores Mumbai's iconic Wadia Clock Tower in Fort

काम पूरा होने पर एक खास कार्यक्रम हुआ, जिसमें धरोहर के जानकार लोग और आसपास के लोग शामिल हुए।

मुंबई। मुंबई के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर्स में से एक, Rustomji ग्रुप ने एक पुरानी और मशहूर इमारत – बोमनजी होरमर्जी वाडिया क्लॉक टावर – की मरम्मत पूरी कर दी है। यह टावर मुंबई के फोर्ट इलाके में बाजार गेट स्ट्रीट और पेरिन नरिमन स्ट्रीट के चौराहे पर है। यह 19वीं सदी का बहुत खास स्मारक है, जो 1882 में नेकदिल व्यक्ति बोमनजी होरमर्जी वाडिया की याद में बनाया गया था। इसमें एक फव्वारा और क्लॉक टावर दोनों हैं। रुस्तमजी ग्रुप ने कला घोड़ा एसोसिएशन के साथ मिलकर इसकी मरम्मत की। काम पूरा होने पर एक खास कार्यक्रम हुआ, जिसमें धरोहर के जानकार लोग और आसपास के लोग शामिल हुए।

रुस्तमजी ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बोमन रुस्तम ईरानी ने कहा, “मुंबई की धरोहर ने हमेशा मुझे प्रभावित किया है क्योंकि यह शहर की आत्मा को दर्शाती है और वे कहानियां बताती है जो हमें आकार देती हैं। वाडिया क्लॉक टावर सिर्फ अतीत का अवशेष नहीं है; यह रोजमर्रा के मुंबई का जीवंत हिस्सा है, जो हर उस व्यक्ति का है जो इससे गुजरता है। हमारा प्रयास इस स्मारक को समुदाय में पहले वाली गरिमा और गौरव वापस लौटाना है।

Rustomji restores Mumbai's iconic Wadia Clock Tower in Fort
रुस्तमजी में शिक्षा को समावेशी विकास की नींव माना जाता है।

​​रुस्तमजी में हम मानते हैं कि जब हम घर बनाते हैं, तो परिवारों को आकार देते हैं, और जब हम धरोहर का संरक्षण करते हैं, तो शहर और उसके लोगों के बीच का बंधन मजबूत करते हैं। बोमनजी होरमर्जी वाडिया के सम्मान में बने इस स्मारक का पुनरुद्धार करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है, जिनकी शिक्षा और सार्वजनिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता आज भी हमें प्रेरित करती है। वाडिया क्लॉक टावर को रिस्‍टोर करके हम उनकी विरासत का सम्मान करते हैं और शहर के भविष्य में शिक्षा के माध्यम से जन गौरव और निवेश की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।”

नागरिक कल्याण की विरासत

यह दर्शन धरोहर से आगे बढ़कर वाडिया की शिक्षा और नागरिक कल्याण की विरासत को सम्मान देता है, जो रुस्तमजी की अपनी प्रतिबद्धताओं से मेल खाता है। रुस्तमजी में शिक्षा को समावेशी विकास की नींव माना जाता है। पिछले तीन वर्षों में उन्होंने कुल 14 करोड़ रुपये के सीएसआर निवेश में से शिक्षा के लिए 6.32 करोड़ रुपये समर्पित किए हैं, जिससे महाराष्ट्र भर में लगभग 750 छात्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। रुस्तमजी फाउंडेशन और उनके टाउनशिप में बने K-12 स्कूलों की मदद से बच्चों की पढ़ाई को बहुत अहम माना जाता है। वे इसे सिर्फ एक अतिरिक्त काम नहीं समझते, बल्कि इसे समुदाय की असली जिम्मेदारी मानते हैं।

बृंदा मिलर, काला घोड़ा एसोसिएशन की चेयरपर्सन, ने कहा, “वाडिया क्लॉक टावर की बहाली मुंबई की समृद्ध धरोहर को संरक्षित करने में सहयोगी प्रयासों का एक प्रमाण है। रुस्तमजी के साथ साझेदारी ने इस ऐतिहासिक स्मारक का पुनरुद्धार किया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए फोर्ट क्षेत्र की सांस्कृतिक जीवंतता को और बढ़ाएगा।”

इस मरम्मत के काम में कई चीजें की गईं। पत्थर की बनी इमारत को और मजबूत किया, पुराने डिजाइन वाले हिस्सों की मरम्मत की, सारी सतह को अच्छे से साफ किया, घड़ी को फिर से चलने लायक बनाया और रात में सुंदर हल्की रोशनी लगाई गई। यह फव्वारा और टावर उस समय बनाया गया था जब मुंबई में प्लेग और हैजा जैसी खतरनाक बीमारियाँ फैली हुई थीं। उस जमाने में घरों में नल से पानी बहुत कम आता था, इसलिए यह फव्वारा साफ पीने के पानी का बहुत जरूरी स्रोत था और सड़कों को साफ-सुथरा रखने में भी मदद करता था।

खूबसूरत निशान बन गया

टावर में अलग-अलग पानी पीने की जगहें थीं – एक इंसानों के लिए, दूसरी घोड़ों के लिए और तीसरी कुत्तों के लिए। इससे यात्री, व्यापारी और आस-पास रहने वाले लोग पानी ले सकते थे। साथ ही टावर पर चार तरफ घड़ियाँ लगी थीं, जो सबको सही समय बताती थीं क्योंकि उस समय लोगों के पास अपनी घड़ी होना बहुत कम आम था। अब यह टावर फिर से पूरी तरह काम करने वाला और रात में चमकता हुआ खूबसूरत निशान बन गया है। यह फोर्ट इलाके के लोगों में गर्व की भावना जगाता है।

संरक्षण वास्तुकार विकास दिलावरी ने कहा, “यह परियोजना सावधानीपूर्वक धरोहर संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें संरचना को स्थिर करते हुए मूल शिल्पकला और कार्यक्षमता को बहाल किया गया है, जिसमें क्‍लॉक मैकेनिज्‍म भी शामिल है, जिससे यह टावर मुंबई के वास्तुशिल्प इतिहास का एक प्रतीक बनकर खड़ा है।”

स्मारक से जुड़ी पारसी विरासत

उद्घाटन के समय एक खास पारंपरिक पारसी दीया जलाने का समारोह हुआ। यह समारोह इसलिए किया गया ताकि स्मारक से जुड़ी पारसी विरासत का सम्मान हो और सबके साथ मिलकर इस पुरानी इमारत के नए जीवन का जश्न मनाया जाए। इस कार्यक्रम से रुस्तमजी की यह बात साफ दिखी कि नए शहर बनाने के साथ-साथ पुरानी संस्कृति और इतिहास को भी बचाना बहुत जरूरी है। बोमनजी होरमर्जी वाडिया क्लॉक टावर की मरम्मत करके रुस्तमजी यह बात और मजबूत करते हैं कि शहर बनाना सिर्फ इमारतें और सड़कें बनाने से ज्यादा है—यह पुरानी यादों, उनके मतलब और सबके साझा गौरव को संभालने की बात है।

जैसे-जैसे मुंबई लगातार तरक्‍की कर रहा है, ऐसी पहलें सुनिश्चित करती हैं कि ऐतिहासिक स्मारक अतीत के धुंधले स्मरण मात्र न रहें, बल्कि शहरी जीवन में सक्रिय भागीदार बने रहें। रिस्‍टोर किया गया क्लॉक टावर अब निरंतरता, समुदाय के गौरव और जिम्मेदार संरक्षण का प्रतीक बनकर खड़ा है, जो रुस्तमजी की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि मुंबई के भविष्य को आकार देते समय उस विरासत का सम्मान किया जाए जो इसे परिभाषित करती है।

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