वैक्सीन के प्रभाव पर व्याख्यान का आयोजन
लखनऊ। Lecture on Vaccination रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय के क्यू-क्लब/स्वास्थ्य क्लब, जनस्वास्थ्य विभाग, मानविकी एवं समाज विज्ञान संकाय द्वारा स्वास्थ्य विभाग, वैक्सीन के प्रभाव पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्व विद्यालय के डॉ. विजय प्रजापति ने वैक्सीन के छोटे डोज एवं उसके बड़े प्रभावों पर विचार व्यक्त करते हुए बताया कि किस प्रकार एण्टीबायोटिक दवाइयों एवं वैक्सीन के विकास से मानव की जीवन प्रत्याशा में वृद्धि हुई है।
26 संक्रामक बीमारियों से बचाव
वैक्सीन माइक्रोऑर्गेनिज़्म के पूरे या कुछ हिस्से होते हैं, जिन्हें किसी इन्फेक्शियस/संक्रामक बीमारी को रोकने के लिए दिया जाता है। टीकाकरण से प्रति वर्ष 30 लाख तक लोगों की जान बचती है। वर्तमान समय में 26 संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीन/टीके उपलब्ध हैं, तथा कई अन्य वैक्सीन को बनाये जाने की प्रक्रिया जारी है। आज भारत सहित दुनिया में जिन संक्रामक बीमारियों से बचाने हेतु वैक्सीन/टीके मौजूद हैं, वह अग्रलिखित हैं- हैजा, डेंगू, डिप्थीरिया, हेपेटाइटिस-ए, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-ई, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी, ह्यूमन पैपिलोमावायरस, इन्फ्लूएंजा, जापानी एन्सेफलाइटिस (दिमागी बुखार), मलेरिया, खसरा, मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस, गलाघोंटू, पर्टुसिस (काली खांसी), न्यूमोकोकल रोग, पोलियोमाइलाइटिस, रेबीज, रोटावायरस, रूबेला, टेटनस, टिक-जनित एन्सेफलाइटिस, तपेदिक, टाइफाइड, वैरिसेला (चिकनपॉक्स), पीत ज्वर आदि।

वैक्सीन/टीके चार प्रकार
- लाइव एटिन्यूएटेड- इसमें कमजोर पैथोजन होते हैं; इसके लिए 1-2 खुराक की ज़रूरत होती है। उदाहरणतः एम.एम.आर., रोटावायरस, वैरिसेला आदि।
- इनएक्टिवेटेड- इसमें मारे गए पैथोजन होते हैं; इसके लिए कई खुराक (बूस्टर शॉट) की ज़रूरत होती है। उदाहरणतः हेपेटाइटिस, रेबीज, इनएक्टिवेटेड पोलियोवायरस वैक्सीन
- सबयूनिट- इसमें पैथोजन के मारे गए, एंटीजेनिक घटक होते हैं; इसके लिए कई खुराक (बूस्टर शॉट) की ज़रूरत होती है। उदाहरणतः एच.पी.वी, न्यूमोकोकल
- टॉक्सॉइड- इसमें पैथोजन द्वारा बनाया गया टॉक्सिन होता है; इसके लिए बूस्टर शॉट की ज़रूरत हो सकती है। उदाहरणतः डिप्थीरिया, पर्टुसिस
विश्वविद्यालय के मानविकी एवं समाज विज्ञान संकाय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ0 राम प्रताप यादव ने डॉ0 विजय प्रजापति का अभिवादन करने के साथ स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। डॉ0 अनिल कुमार ने मुख्य वक्ता एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान डॉ0 मैत्री बाजपेई, डॉ0 वैशाली, आकाश यादव एवं 50 से अधिक विद्यार्थियों के साथ डॉ0 विजय कुमार सिंह, डॉ0 संजय सोनकर, डॉ0 कुणाल सिंह, डॉ0 पल्लवी शर्मा, डॉ0 खुशबू, डॉ0 राघवेन्द्र सिंह, डॉ0 अनिल कुमार-2, डॉ0 पुनीत गुप्ता, डॉ0 शैलेन्द्र आदि मौजूद रहे।
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