दिल्ली धमाके में बड़ा खुलासा: कार में था Terrorist Umar, डीएन जांच से हुआ साफ

Major revelation in Delhi blast: Terrorist Umar was in the car, DNA test confirms

कार में चिथड़ों में मिली लाश से लिए डीएनए के नमूने का उमर की मां के डीएनए से मिलान हो गया है।

नईदिल्ली।Terrorist Umar ​ ​नईदिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुआ धमाके की परते धीरे-धीरे खुलने लगी है। धमाके में मारे गए आतंकिया और मददगारों की जानकारी साजने आने लगी है। अब तक सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। कार में विस्फोट करने वाला सफेद पोश आतंकी डॉ. उमर नबी ही था। यह बात घटना स्थल पर कार में चिथड़ों में मिली लाश से लिए डीएनए के नमूने का उमर की मां के डीएनए से मिलान हो गया है।

बुधवार देर रात पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने इस बात को साफ कर दिया है कि विस्फोटक से लदी आई 20 कार में मौजूद शख्स डॉक्टर उमर मोहम्मद ही था। घटना स्थल पर कार में चिथड़ों में मिली लाश से लिए डीएनए के नमूने का उमर की मां के डीएनए से मिलान हो गया है। इससे पुष्टि हो गई है कि उमर ने ही दिल्ली में कार धमाका किया था। धमाके में खुद भी मारा गया। पुलवामा के संबूरा में रहने वाले डॉक्टर उमर के परिजनों से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पूछताछ भी की है। उमर की मां और भाई ने डीएनए सैंपल दिए थे, जो धमाके में इस्तेमाल कार के मलबे से मिले अवशेषों से मिल गया।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) व दिल्ली पुलिस को बुधवार देर रात डीएनए जांच की रिपोर्ट मिली। इससे साफ हो गया कि आई20 कार उमर नबी ही चला रहा था और धमाके में उसकी भी मौत हो गई। उसने आई20 में विस्फोटक लाद रखा था। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि उमर वाहन से जुड़ा विस्फोटक यानी कार बम बनाने की कोशिश में जुटा था और इसके लिए उसने इंटरनेट से जानकारी जुटाई। 10 नवंबर को साथियों की गिरफ्तारी से डरकर उमर ने बौखलाहट में विस्फोट कर दिया।

एक और घायल ने तोड़ा दम

लाल किले के सामने हुए बम धमाके में एक और घायल ने गुरुवार सुबह दम तोड़ दिया। दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, धमाके में 13 लोगों की जान जा चुकी है। मृतक का नाम बिलाल बताया जा रहा है, जो कि दिल्ली से बाहर का रहने वाला है। दिल्ली पुलिस अधिकारियों कहना है कि अस्पताल से गुरुवार सुबह सूचना मिली थी उसके बाद पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचे। दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी 16 से ज्यादा घायल अस्पताल में भर्ती हैं, जो कि दिल्ली के विभिन्न अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस अधिकारी को कहना है कि इन सभी की हालत खतरे से बाहर है और सभी का इलाज किया जा रहा है।

फोरेंसिक टीम ने विस्फोट स्थल से अब तक 40 से ज्यादा नमूने एकत्र किए हैं। एफएसएल ने नमूनों का विश्लेषण करने के लिए विशेष टीम का गठन किया है। विस्फोट के बाद से एफएसएल प्रयोगशाला 24 घंटे काम कर रही है। गौरतलब है कि मौके से दो कारतूस और दो अलग-अलग तरह के विस्फोटकों के नमूने भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

ब्लास्ट वेव से फटे कान के पर्दे, फेफड़े और आंत

लाल किले के पास हुए धमाके की तीव्रता इतनी अधिक रही कि ब्लास्ट वेव से कई लोगों के कान के पर्दे, फेफड़े और आंतें फट गईं। कुछ शवों में फेफड़ों, कान और पेट के भीतर ब्लास्ट वेव से नुकसान के संकेत मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि धमाका अत्यंत नजदीक से हुआ। किसी भी विस्फोट के समय अत्यधिक दाब और तापमान से उत्पन्न गैसीय लहर को ब्लास्ट वेव कहते हैं। इससे पता लगता है कि बम धमाका कितना भीषण था।पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि कई लोगों की मौत के पीछे की वजह धमाके की वजह से लगी गहरी चोट और अत्यधिक खून का बहाना रही। इस दौरान क्रॉस इंजरी पैटर्न भी देखा गया। धमाके के झटके से लोग दीवार या जमीन से टकरा गए। अधिकतर शवों में चोटें ऊपरी शरीर, सिर या छाती पर लगी थी।

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