नई दिल्ली।Mission 2027 विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ने देश के सबसे राज्य यूपी में अपने प्रदेश अध्यक्ष को चुनने के अंतिम दौड़ में है। हालांकि अभी तक चुनाव की नौबत नहीं आई,फिर भी शनिवार से नामांकन होगा। अगर एक से अधिक नामांकन होगा तो रविवार को मतदान होगा, इसके बाद जो जीतेगा वह यूपी में पार्टी का 17वां अध्यक्ष बनेगा। पार्टी की यह पूरी कवायद मिशन 2027 के फतेह करने के लिए। इस रेस में सबसे आगे केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी का नाम चल रहा है। उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने के कयास तेज हो गए। गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर चली तीन घंटे की बैठक में चौधरी के नाम पर सहमति बनने की खबर के बाद वह रेस में सबसे आगे हैं।
आज से नामांकन फिर एलान
चुनाव के लिए शनिवार से नामांकन होना है, यदि एक से अधिक नाम सामने आए तो रविवार को चुनाव होगा। अगर एक ही नाम सामने आया तो सहमति से एलान किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूपी के नए अध्यक्ष के लिए कई नामों पर चर्चा हुई। यह जिम्मेदारी किसी ओबीसी चेहरे को देने की सहमति बनी। सूत्रों के अनुसार योगी सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह और पंकज चौधरी के नाम पर मंथन के बाद पंकज के नाम पर सहमति बन गई।
पंकज का दावा मजबूत क्यों?
पंकज कुर्मी बिरादरी से हैं, जो ओबीसी में यादव के बाद सबसे बड़ी आबादी वाली है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्वांचल में कुर्मी वोटों के छिटकने से बड़ा नुकसान हुआ था। केंद्रीय नेतृत्व सपा की बढ़त की काट के लिए अपना पुराना कुर्मी, ठाकुर, ब्राह्मण समीकरण को मजबूत बनाए रखना चाहता है। सात बार के सांसद चौधरी की पूर्वांचल के कुर्मियों में अच्छी पैठ है। दूसरी ओर धर्मपाल सिंह लोध बिरादरी से हैं। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में भी यह बिरादरी कमोबेश भाजपा के साथ खड़ी रही थी।
पार्षद से शुरू किया राजनीति का सफर
15 नवंबर 1964 को जन्मे गोरखपुर के उद्योगपति स्वर्गीय भगवती चौधरी एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष उज्ज्वल चौधरी के छोटे बेटे पंकज चौधरी ने गोरखपुर नगर निगम के पार्षद के तौर पर 1989 में राजनीति का सफर शुरू किया। वर्ष 1990 में ही भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्य समिति सदस्य हुए। 10वीं लोकसभा में वर्ष 1991 में महराजगंज संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए। 11वीं और 12वीं लोकसभा में वर्ष 1996, 1998 में सांसद चुने गए। 1999 में सपा के अखिलेश से हार मिली पर 2004 में फिर निर्वाचित हुए। 2009 में कांग्रेस के स्वर्गीय हर्षवर्धन से हार मिली। 2014 से लगातार लोकसभा के सदस्य हैं।
