टाटा मुंबई मैराथन 2026 में अर्पण के #POCSOPakadLega अभियान ने बाल लैंगिक शोषण के ख़िलाफ़ ज़ोरदार आवाज़ उठाई

Arpan's #POCSOPakadLega campaign at the Tata Mumbai Marathon 2026 raises a strong voice against child sexual abuse

अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सार्वजनिक जवाबदेही को मज़बूत किया।

मुंबई: अर्पण वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो बाल लैंगिक शोषण को जड़ से ख़तम करने के लिए लगातार काम कर रही है। अर्पण संस्था ने बाल सुरक्षा सप्ताह (Child Safety Week) 2025 के दौरान शुरू किए गए अपने प्रभावशाली #POCSOPakadLega अभियान की गति को टाटा मुंबई मैराथन 2026 तक पहुँचाया। भारत के सबसे चर्चित सार्वजनिक मंचों में से एक का उपयोग करते हुए, अर्पण ने बाल लैंगिक शोषण के बारे में जागरूकता फैलाई, मैराथन में शामिल रनर्स, समर्थकों और नागरिकों के बीच संवाद को बढ़ावा दिया और लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सार्वजनिक जवाबदेही को मज़बूत किया।

बच्चों का शोषण रूके

#POCSOPakadLega अर्पण के प्रमुख जन-जागरूकता अभियान बाल सुरक्षा सप्ताह का मुख्य विषय था। इसे हर साल 14 से 20 नवंबर तक मनाया जाता है। इस अभियान का चेहरा सबसे प्रशंसित अभिनेत्री विद्या बालन (अर्पण की गुडविल एंबेसडर) रहीं। इस पहल ने देशभर में 16.5 करोड़ से अधिक लोगों तक अपनी पहुँच बनाई। थीम का उद्देश्य अपराधियों को सीधे निशाना बनाना और एक सख़्त संदेश देना था : “किसी भी बच्चे को गलत तरीके से छुआ तो #POCSOPakadLega”। यह संदेश चेतावनी और रोकथाम दोनों के रूप में काम करता है। इससे POCSO अधिनियम को लोगों के सामने स्पष्ट रूप से पेश किया गया और जवाबदेही को वास्तविक बनाया गया।

Arpan's #POCSOPakadLega campaign at the Tata Mumbai Marathon 2026 raises a strong voice against child sexual abuse
POCSO अधिनियम को लोगों के सामने स्पष्ट रूप से पेश किया गया और जवाबदेही को वास्तविक बनाया गया।

टाटा मुंबई मैराथन 2026 में अर्पण संस्था द्वारा ड्रीम रन के दौरान इस संदेश को एक बार फिर सक्रिय रूप से मज़बूती के साथ रखा गया। अर्पण की टीम एकजुट होकर एक सामूहिक आवाज़ बनी और प्लेकार्ड्स तथा प्रभावशाली नारों के ज़रिए #POCSOPakadLega का संदेश दिया गया, जो सामूहिक ज़िम्मेदारी और समुदाय की ताक़त को दर्शाते थे। इस अवसर पर अर्पण संस्था ने सभी वयस्क भागीदारों से अपील की और उन्हें याद दिलाया कि जब वयस्क कदम उठाते हैं, तब POCSO जैसे कानून ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू होते हैं और अपराधियों को जवाबदेह बनाया जा सकता है।

अर्पण संस्था ने किया सहयोग

टाटा मुंबई मैराथन में अर्पण की ऑन-ग्राउंड सहभागिता का दूसरा प्रमुख हिस्सा मोटिवेशनल ज़ोन स्टेज रहा। यहाँ एक मोटराइज़्ड हथकड़ी इंस्टॉलेशन लगाया गया, जिसने #POCSOPakadLega के मुख्य संदेश को विज़ुअली मज़बूत किया कि अपराधी पकड़े जाएँगे और कानून के तहत उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। लोगों का ध्यान खींचने और उन्हें सोचने पर मज़बूर करने वाले इस इंस्टॉलेशन ने रनर्स, समर्थकों और दर्शकों को रुककर संदेश से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही, अर्पण संस्था ने एक सार्वजनिक संकल्प बोर्ड भी लगाया, जहाँ प्रतिभागियों को बाल सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्ज करने और बाल लैंगिक शोषण की रोकथाम में अपनी भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया गया।

अभियान संदेश के साथ विद्या बालन के लाइफ-साइज़ कट-आउट के साथ फ़ोटो-ऑप की व्यवस्था की गई, जिससे प्रतिभागियों को मंच पर आकर इंस्टॉलेशन से जुड़ने और अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर संदेश साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। माहौल अद्भुत था क्योंकि मुंबई की कभी न हारने वाली भावना ने हजारों धावकों को #POCSOPakadLega अभियान की ओर आकर्षित किया और उनमें से सैकड़ों हमारे साथ जुड़ गए। 18 से 80 वर्ष तक के मैराथन प्रतिभागियों ने अर्पण के इस अभियान के साथ कदम से कदम मिलाया। किसी ने थिरकते हुए उत्साह जताया, किसी ने हमारे साथ गीत गाए और कईयों ने बच्चों की सुरक्षा के लिए संकल्प लिया।पिछले साल अर्पण संस्था को टाटा मुंबई मैराथन 2025 में बेस्ट मोटिवेशनल ज़ोन स्टेज के लिए सेकंड रनर-अप के रूप में सम्मानित किया गया था। इस साल के एक्टिवेशन ने रोकथाम और विज़िबिलिटी पर अपना फोकस और गहरा किया है।

Arpan's #POCSOPakadLega campaign at the Tata Mumbai Marathon 2026 raises a strong voice against child sexual abuse
बाल लैंगिक शोषण की रोकथाम में अपनी भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया गया।

चुप्पी तोड़ने और अपराधियों को जवाब देने की पहल

“#POCSOPakadLega भारत में लंबे समय से चली आ रही चुप्पी को तोड़ने और अपराधियों को जवाबदेह ठहराने की पहल है। बाल लैंगिक शोषण के बारे में अब फुसफुसाकर बात नहीं होनी चाहिए और अपराधी सज़ा से बच नहीं सकते। टाटा मुंबई मैराथन जैसे मंच हमें इस बातचीत को मुख्यधारा तक ले जाने का अनोखा अवसर देते हैं, जहाँ 60,000 से अधिक प्रतिभागियों तक पहुँचकर जागरूकता को सामूहिक ज़िम्मेदारी में बदला जा सकता है। अगर एक संकल्प से कोई एक वयस्क बच्चे की सुरक्षा के लिए आगे आता है, तो यह किसी बच्चे का भविष्य हमेशा के लिए बदल सकता है।” इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाल लैंगिक शोषण की रोकथाम पर बातचीत को बढ़ाना, POCSO अधिनियम को लोगों के सामने स्पष्ट रूप से पेश करना और अपराधियों को जवाबदेह ठहराना था। इसे ज़मीनी स्तर पर रचनात्मक सहभागिता, सशक्त संदेशों और सक्रिय जनभागीदारी के माध्यम से प्रभावी रूप से साकार किया गया।

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