GITM University ने अकादमिक अनुसंधान पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव आयोजित किया

GITM University organised National Conclave on Academic Research

यह कार्यक्रम गिटम स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग द्वारा आयोजित किया गया।

नईदिल्ली:GITM University  आने वाले दशकों में भारत की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि विश्वविद्यालय समाज, उद्योग और सरकार के लिए ज्ञान को कितनी प्रभावी रूप से समाधानों में बदल पाते हैं। इसी जिम्मेदारी को दर्शाते हुए गिटम यूनिवर्सिटी ने 4 से 6 मार्च 2026 तक सीएआर 2026 (कॉन्क्लेव ऑन अकादमिक रिसर्च) का आयोजन किया। यह कार्यक्रम गिटम स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग द्वारा आयोजित किया गया।

चार दशकों से अधिक समय से गिटम ईमानदारी, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी से प्रेरित ज्ञान की खोज पर केंद्रित एक अकादमिक इकोसिस्टम विकसित करने के लिए काम कर रहा है। हाल के वर्षों में इस दिशा का विस्तार बहुविषयक अनुसंधान सहयोग और उद्योग व वैज्ञानिक संस्थानों के साथ मजबूत सहभागिता के रूप में हुआ है। सीएआर 2026 इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों की उस भूमिका को मजबूत करना है जिसके माध्यम से तकनीकी प्रगति और सामाजिक विकास में योगदान देने वाला ज्ञान आगे बढ़ सके।

अकादमिक अनुसंधान वास्तविक तकनीकी

इस कॉन्क्लेव में शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया और कंप्यूटिंग तथा उससे जुड़े क्षेत्रों में उभरते विकास पर चर्चा की। साथ ही यह भी विचार किया गया कि अकादमिक अनुसंधान वास्तविक तकनीकी चुनौतियों का समाधान कैसे दे सकता है। चर्चाओं का मुख्य फोकस मूलभूत अनुसंधान, उद्योग की जरूरतों और भविष्य की प्रतिभाओं के विकास के बीच संबंध को मजबूत करने पर रहा।

उद्घाटन सत्र में डॉ. बी. सुंदर राजन, प्रोफेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस; डॉ. गुरु प्रसाद ए. एस., ग्लोबल प्रैक्टिस हेड – मोबिलिटी, एल एंड टी टेक्नोलॉजी सर्विसेज; और प्रो. बसवराज जी. के., प्रो-वाइस चांसलर, गिटम यूनिवर्सिटी उपस्थित रहे। गिटम स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के संकाय नेतृत्व में प्रो. वामसीधर वाई., स्कूल के निदेशक; प्रो. आई. जीना जैकब, प्रोफेसर; और प्रो. एस. अरुण कुमार, डीन, ने भी कॉन्क्लेव में भाग लिया। प्रो. मोहन के. जी. ने सीएआर 2026 के समन्वयक के रूप में कार्य किया।

तीन दिवसीय आयोजन

तीन दिनों तक चले इस कार्यक्रम में तकनीकी सत्र और विद्वतापूर्ण चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें शोधकर्ताओं ने कंप्यूटिंग सिस्टम, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटेलिजेंट मोबिलिटी और अन्य संबंधित तकनीकी क्षेत्रों में हो रहे समकालीन विकास पर अपने शोध प्रस्तुत किए। इन सत्रों ने अकादमिक शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों के बीच संवाद को बढ़ावा दिया, ताकि शोध के परिणाम प्रयोगशालाओं से निकलकर व्यावहारिक उपयोग में आ सकें।

दुनिया भर में विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल शिक्षा ही नहीं दें, बल्कि ऐसा ज्ञान भी विकसित करें जो आर्थिक विकास, तकनीकी क्षमता और सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाए। डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और वैज्ञानिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताएं अब विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग पर अधिक निर्भर होती जा रही हैं।

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