ज़रा सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाये, दिये से मेरी माँ मेरे लिए काजल बनाती है

छू नहीं सकती मौत भी आसानी से इसको यह बच्चा अभी माँ की दुआ ओढ़े हुए है

यूँ तो अब उसको सुझाई नहीं देता लेकिन माँ अभी तक मेरे चेहरे को पढ़ा करती है

ऑनलाइन उपस्थिति का शिक्षकों ने शुरू किया विरोध

परिंदों के लिए शहरों में पानी कौन रखता है नये कमरों में अब चीजें पुरानी कौन रखता है

हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं