महाराष्ट्र के सांगली की रहने वाली स्मृति मंधाना बचपन से ही लड़कों के साथ खेलती थीं। पिता और भाई दोनों क्लब क्रिकेटर थे।

हरियाणा के रोहतक की शफाली वर्मा ने जब गली क्रिकेट में बल्ला थामा, तो उन्हें कई बार ‘लड़कों वाला खेल’ कहकर रोका गया। लेकिन शफाली नहीं रुकीं।

मुंबई की जेमिमा रॉड्रिग्स एक चर्च संगीतकार परिवार से आती हैं। पिता स्कूल में कोच हैं। पढ़ाई, म्यूजिक और क्रिकेट, तीनों में निपुण जेमिमा की मुस्कान जितनी प्यारी है, उतनी ही खतरनाक है उनकी बल्लेबाजी।

मोगा (पंजाब) की हरमनप्रीत कौर भारतीय महिला क्रिकेट की धड़कन हैं। 2017 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी 171* रनों की पारी ने उन्हें ‘लेडी धोनी’ बना दिया।

मोहाली की रहने वाली अमनजोत ने पंजाब के संगरूर जिले से क्रिकेट का सफर शुरू किया। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन पिता की हिम्मत ने उन्हें आगे बढ़ाया।

आगरा की दीप्ति शर्मा टीम की सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर हैं। उन्होंने अपने भाई के साथ अभ्यास करते हुए क्रिकेट सीखा।

पश्चिम बंगाल की ऋचा घोष मैदान पर जोश की प्रतीक हैं। पिता खुद क्रिकेट कोच हैं। 16 साल की उम्र में उन्होंने भारत के लिए खेलना शुरू किया।

मुंबई की धारावी झुग्गियों से निकलकर राधा यादव ने ऐसा सफर तय किया, जो प्रेरणा बन गया। बाएं हाथ की यह स्पिनर अपनी विविधता से किसी भी बल्लेबाज को उलझा देती हैं।

मध्य प्रदेश की क्रांति गौड़ कभी नेट बॉलर थीं। पिता की नौकरी छूटने के बाद घर चलाना मुश्किल था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से आने वाली श्री चरणी ने खो-खो और बैडमिंटन खेलते हुए क्रिकेट को अपनाया। गांव की धूल भरी पिच से अब विश्व कप फाइनल तक, उनका सफर अद्भुत रहा है।

हिमाचल के छोटे से गाँव पार्सा की रेणुका ठाकुर की कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। पिता की मौत के बाद माँ ने उन्हें अकेले पाला।