Ravi River दुश्मन को सबक सिखाने भारत ने उठाया एक और कदम, पाकिस्तान में गर्मी में पानी के लिए मचेगा हाहाकार

India takes another step to teach a lesson to the enemy, there will be a water crisis in Pakistan this summer.

यह परियोजना पाकिस्तान के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।

नई दिल्ली।Ravi River आतंकियों को पालने —पोषने वाले पाकिस्तान के लिए यह साल सबसे कठीन होने जा रहा है, क्यों​कि भारत ने उसे सबक सिखाने के लिए एक और झटका देने की तैयारी में जुटा हुआ है। दरअसल सिंधु जल समझौते को निलंबित करने के बाद अब रावी नदी के पाकिस्तान की तरफ बहने वाले अतिरिक्त जल को भी रोकने की तैयारी है। सरकार रावी नदी के भारत के हिस्से के जल को भी पाकिस्तान जाने से रोकने की योजना बना रही है। अगर ऐसा होता है तो गर्मी के मौसम में पाकिस्तान में पानी के लिए हाहाकार मचना तय है। शाहपुर कंडी बांध परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है और यह परियोजना पाकिस्तान के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।

जम्मू कश्मीर के मंत्री ने दी जानकारी

जम्मू कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राना ने बताया कि शाहपुर कंडी बांध का काम पूरा हो जाएगा तो उसकी मदद से रावी नदी के भारत के हिस्से के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान की तरफ बहने से भी रोका जा सकेगा। उक्त पानी को सूखा प्रभावित कठुआ और सांबा जिलों की तरफ डायवर्ट किया जा सकेगा। शाहपुर कंडी बांध का काम 31 मार्च तक पूरा हो सकता है। जावेद अहमद राना ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘पाकिस्तान को जाने वाला अतिरिक्त पानी रोका जाएगा और ये रोका भी जाना चाहिए। कठुआ और सांबा जिले सूखाग्रस्त है और ये प्रोजेक्ट हमारी प्राथमिकता है, जो कंडी इलाके में बनाया जा रहा है।’

सूखाग्रस्त इलाकों को दिया जाएगा

अभी रावी नदी का भारत के हिस्से का पानी भी बहकर पाकिस्तान चला जाता है। अब शाहपुर कंडी बांध की मदद से इस पानी को रोककर इसे पंजाब और जम्मू कश्मीर के सूखाग्रस्त इलाकों को दिया जाएगा। शाहपुर कंडी बांध परियोजना की योजना साल 1979 में रावी नदी के भारत के हिस्से के पानी को पाकिस्तान जाने से रोकने के लिए बनाई गई थी।साल 1982 में इस बांध की आधारशिला पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने रखी। हालांकि पंजाब और जम्मू कश्मीर के बीच विवाद के चलते इसका निर्माण कार्य रुक गया। साल 2008 में इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय प्रोजेक्ट घोषित किया गया।इस बांध को बनाने की लागत करीब 3394 करोड़ रुपये है, जिसमें से पंजाब सरकार ने 2694 करोड़ और बाकी 700 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने दिए हैं।यह बांध 55 मीटर ऊंचा और 7.7 किलोमीटर लंबा है। इस बांध की मदद से पंजाब में करीब 5000 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी।

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