सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम के द्वारा डिजास्टर के खतरों से बचा जा सकता है: डॉक्टर राम प्रताप यादव

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के जेके सभागार में वर्ल्ड डिजास्टर मैनेजमेंट के छठवें प्री-कॉन्फ्रेंस में अकादमिक पैनल बहस आयोजित की गई जिसमे, सोशल वर्क विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय एवं श्री रामस्वरूप विश्वविद्यालय के छात्रों तथा सरकारी एवं गैर सरकारी प्रोफेशनल मौजूद रहे। विश्व डीसास्टर मैनेजमेंट के छठे प्री -कार्यशाला का संयुक्त आयोजन लखनऊ विश्वविद्यालय एवं श्री रामस्वरूप विश्वविद्यालय ने उत्तराखंड एवं यूपी सरकार के राज्य आपदा प्रबंधन संस्थान के संयुक्त तत्वाधान मे किया। इस कार्यशाला को अलग-अलग चार पैनल्स में बांटा गया था। अकादमिक और पेशेवर विशेषज्ञों ने दुनिया को बर्बादी से बचाने ने के अंत:अनुशासनिक शिक्षा के माध्यम से संभावित प्रयासों एवं उपायों पर महत्वपूर्ण चर्चा की।

अभिनेता अमिताभ बच्चन के रिकॉर्डेड वीडियो के द्वारा हुआ। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजास्टर मैनेजमेंट के डायरेक्टर प्रोफेसर अनिल गुप्ता के स्पेशल मैसेज के द्वारा इस वर्कशाप का शुभारंभ हुआ। इसके अलावा प्रोफेसर दुर्गेश पंत तथा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर दीप नारायण पांडे का उद्बोधन प्रमुख रहा। पैनल डिस्कशन एक में चेयर करते हुए श्री के के सिन्हा (रिटायर्ड आईएएस) ने कहा कि अकादमिक संस्थानों एवं सरकारी प्रयासों में व्यवहारिकता के साथ समाधान ढूंढने की जरूरत है। तथा डिजास्टर मैनेजमेंट के पाठ्यक्रमों को रोजगार पर बनाना होगा ।

डिजास्टर मैनेजमेंट को समझाने का प्रयास

रिटायर्ड डायरेक्टर (फायर) डॉक्टर पीके राव ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें मैन मेड डिजास्टर से बचने के उपायों को समुदायों तक पहुंचाना होगा । स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट संगठन के डॉक्टर भानु प्रताप मल्ल ने शोधकर्ताओं को अकादमिक क्षेत्र मे अधिक रिसर्च को बढ़ावा देने की अपील की।

श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. राम प्रताप यादव ने *सनातन पद्धति* के द्वारा डिजास्टर मैनेजमेंट को समझाने का प्रयास किया तथा उन्होंने *नज थिअरी* का उदाहरण देते हुए लोगों से अपील की कि जिस प्रकार मोदी सरकार ने व्यवहार परिवर्तन के लिए इस सिद्धांत का योजना आयोग द्वारा बाकायदा करवाया उसी प्रकार से हमें समस्त खतरों से बचने के लिश्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. राम प्रताप यादव ने *सनातन पद्धति* के द्वारा डिजास्टर मैनेजमेंट को समझाने का प्रयास किया ए उन सनातन एवं आध्यात्मिक पद्धतियों का अनुसरण करना होगा जो हजारों वर्षों से प्रकृति के साथ जीने के हमारे अभ्यास में शामिल रही है। उन्होंने कहा की अतः अनुशासनिक अध्ययन एवं सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम के द्वारा डिजास्टर के खतरों के से बचा जा सकता है।

‘मेंटल हेल्थ एक्ट-2018’

डॉक्टर यादव ने तमाम सारे नीतिगत निर्णय का अनुपालन एक कोऑर्डिनेशन एवं समग्रता से करने का सुझाव दिया तथा कहा जिस प्रकार कोविड -19 के पहले से ही भारत सरकार ने ‘मेंटल हेल्थ एक्ट-2018’को लागू किया उसी प्रकार डिजास्टर से बचने के लिए हमें संपूर्ण शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा। एसआरएमयू की डॉक्टर श्वेता शुक्ला एवं लखनऊ विश्वविद्यालय की डॉक्टर अनीता वर्मा ने घरेलू उदाहरणों के माध्यमों से उपस्थित दर्शक दीर्घा को यह समझाने का प्रयास किया कि डिजास्टर से बचने के उपायो मे, सबसे पहले घर में और फिर आसपास में जागरूकता फैला करके उसे सामाजिक प्रयोग में लाना होगा।

डॉ अरुण कुमार सिंह

रज्जू भैया विश्वविद्यालय इलाहाबाद की डॉक्टर कविता गौतम, केजीएमयू के डॉक्टर कृष्ण दत्त, डॉ अरुण कुमार सिंह और योगेश कुमार एचसीएल फाऊंडेशन ने भी डिजास्टर मैनेजमेंट के नवीन पक्ष को सामने रखा। कार्यक्रम की विशिष्ट शोभा  सतीश कुमार (आईपीएस) एसडीआरएफ कमांडेंट यूपी सरकार रहे।कार्यक्रम के अतिथियों का स्वागत सह संयोजक डा. आफिया बानो ने किया। तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो . राजकुमार सिंह ने किया। सुश्री लक्ष्मी सिंह, डा.पवित्रा वाजपेई एवं डा. शिल्पा शुक्ला, नीति कुशवाहा तथा अन्य छात्र छात्राओं का विशिष्ट सहयोग रहा। इस वर्कशाप से एसआरएमयू एव लखनऊ विश्विद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्रा लाभान्वित हुए।

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