Friday, September 30, 2022
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फेसबुक के ट्रेड टूल से यूं हो रही ह्यूमन ट्रैफिकिंग,पूर्व कर्मचारी का नया खुलासा

नई दिल्ली। दो बरस पहले एपल ने फेसबुक और इंस्टाग्राम को अपने ऐप स्टोर से हटाने की धमकी दी थी। इसके पीछे का कारण इन ऐप में इस्तेमाल होने वाले ट्रेड टूल को माना गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एपल ने इन दोनों प्लेटफॉर्म पर आरोप लगाते हुए कहा था कि फेसबुक प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं को नौकरानी के तौर पर सऊदी अरब, ईरान, इराक और अफगानिस्तान जैसे मिडिल ईस्ट देशों में ह्यूमन ट्रैफिकिंग को बढ़ावा मिल रहा है।

कहा गया कि ये महिलाओं का शोषण करने वाले टूल्स की तरह इस्तेमाल हो रहे हैं। एपल के सार्वजनिक तौर पर इन ऐप को हटाने का ऐलान करने के बाद फेसबुक ने माना था कि वह इस तरह की अपमानजनक एक्टिविटी को अपने प्लेटफॉर्म से रिमूव करने पर काम करेगा। बताया गया कि एपल ने फेसबुक के इस स्टेटमेंट के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम को स्टोर से नहीं हटाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फेसबुक पर आज भी ये एक्टिविटी धड़ल्ले से जारी है।

यूं हुआ नया खुलासा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार व्हिसलब्लोअर फ्रांसेस हौगेन लगातार फेसबुक को लेकर बड़े खुलासे कर रही हैं। बताया गया कि हौगेन फेसबुक में डेटा एनालिस्ट रह चुकी हैं। यह खुलासा सोमवार को हौगेन ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन को दिए गए बयान में किया है। उनके मुताबिक यदि आप आज भी फेसबुक पर अरबी में ‘खादीमा’ या ‘मेड्स’ सर्च करते हैं तो अफ्रीकियों और दक्षिण एशियाई महिलाओं की उम्र और उनकी फोटोज कीमत के साथ लिस्टेड रहती हैं।

इन्हें कोई भी यूजर्स अपने पसंद के हिसाब से हायर कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एसोसिएटेड प्रेस को फेसबुक ने बताया कि मिडिल ईस्ट में विदेशी मजदूरों के साथ शोषण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हम इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं। हम अपने प्लेटफॉर्म पर मानव तस्करी की समस्या से कई साल से जूझ रहे हैं।

ये भी हैं फेसबुक से जुड़े विवाद

एक अन्य खुलासे में फ्रांसेस हौगेन द्वारा फेसबुक पर लगाए गए आरोप के मताबिक उसके प्रोडक्ट बच्चों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके बाद टाइम मैगजीन ने भी जुकरबर्ग को निशाने पर लिया था। फेसबुक का विरोध करते हुए मैगजीन ने अपने कवर पर जुकरबर्ग का फोटो लगाकर ‘डिलीट फेसबुक’ के टेक्स्ट के साथ ‘कैंसिल या डिलीट’ का ऑप्शन को छापा था।

वहीं हौगेन ने एक दूसरे खुलासे में बताया गया कि भारत में यह प्लेटफॉर्म ‘फेकबुक’ (फर्जी सामग्री की पुस्तक) की शक्ल लेता जा रहा है। कहा गया कि इस समूह में ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ भी शामिल है। इसके लिए हौगेन ने इन रिपोर्टों-अध्ययनों के दस्तावेज जुटाए।

इनके आधार पर वे लगातार फेसबुक की कार्य-संस्कृति, अंदरूनी खामियों इत्यादि से जुड़े खुलासे कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके द्वारा सार्वजनिक किए गए ‘फेसबुक पेपर्स’ के अनुसार भारत में फर्जी अकाउंट्स से फेक न्यूज के माध्यम से चुनावों को भी प्रभावित किया जा रहा है।

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