लखनऊ: फीमिट्स के छात्र-छात्राओं ने कुछ यूं समझाई ‘हिन्दी की महिमा’, दिया ये खास संदेश

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लखनऊ के मोती महल लॉन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला के मंच पर शुक्रवार को कल्याणपुर स्थित फिल्म इंस्टीट्यूट ऑफ इमिट्स (फीमिट्स) के छात्रों ने नुक्कड़ नाटक 'हिन्दी बीमार है' पेशकर समां बांध दिया।

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ के मोती महल लॉन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला के मंच पर शुक्रवार को कल्याणपुर स्थित फिल्म इंस्टीट्यूट ऑफ इमिट्स (फीमिट्स) के छात्रों ने नुक्कड़ नाटक ‘हिन्दी बीमार है’ पेशकर समां बांध दिया। छात्रों ने बेहतरीन अभिनय और चुटीले संवादों के जरिये ‘हिन्दी बचाओ, संस्कृति बचाओ’ का नारा दिया। यहां आयोजित नुक्कड़ नाटक में एक छात्रा को ‘बुजुर्ग हिन्दी मां’ के रूप में दर-दर भटकते दिखाया गया। उसे बैठने के लिए भी जगह नहीं मिलती। जब ‘हिन्दी मां’ चिकित्सालय का पता पूछती है तो एक मॉडर्न युवक बड़ी मुश्किल से उसे गूगल की मदद से हॉस्पिटल लेकर पहुंचता है।

फिर रास्ते में ‘हिन्दी मां’ को एक बंगाली और मराठी महिला मिलती है तो वह बेहद आसानी से उनकी भाषा समझ लेती है। यह देखकर युवक आश्चर्य में पड़ जाता है तो ‘हिन्दी मां’ उसे समझाती है कि वह सब भाषाओं की मां है और इसीलिए आसानी से सभी की भाषा समझ लेती है। और तो और रास्ते में ‘हिन्दी मां’ से अंग्रेजी सिखाने की भी गुहार लगायी जाती है। तब वह समझाती है, ‘मांगना है तो ज्ञान मांगो, शब्दों की जानकारी तो तुम्हारा गूगल भी दे सकता है।’ वहीं’हिन्दी मां’ अस्पताल पहुंचने पर खुद को बेहद बीमार बताती है तो डॉक्टर कहता है कि उन्हें ‘इग्नोरेशिया’ की बीमारी है यानी लोगों के हिन्दी के प्रति नकारात्मक रुख के कारण ही वह बीमार पड़ी है।

देश में बच्चे के जन्म के साथ ही अंग्रेजी की टॉनिक पिलाया जाने लगता है। पहले संस्कृत को दिमाग से निकाल दिया गया और अब हिन्दी के साथ भी वही सुलूक किया जा रहा है। नुक्कड़ नाटक के जरिये छात्रों ने हिन्दी की दुर्दशा के लिए राजनीति को भी जिम्मेदार बताया। नेताजी का रोल निभा रहे छात्र ने अंग्रेजी मिश्रित हिन्दी में भाषण देते हुए हिन्दी को संग्रहालय में रखवाने की मंशा जताई। हालांकि बाद में उन नेताजी को अपनी गलती का अहसास होता है और वह महसूस करते हैं कि हिन्दी ही सारे देश को एक माला में पिरोकर रखती है। नाटक में फीमिट्स के छात्र-छात्राओं ने बेहद सधा अभिनय करके लोगों की जमकर तालियां बटोरीं। प्रस्तुति के दौरान शिवांशु, सिद्धी, हेमलता, सौम्या, मानसी और नैना ने अपने चुटीले संवादों से लोगों को मातृभाषा का ख्याल रखने का भी संदेश दिया। इस मौके पर भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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