नई टीम के साथ भूपेंद्र पटेल गुजरात में बनाएंगे अगली सरकार का रास्ता, सभी पुराने चेहरों की विदाई

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गुजरात। पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में भाजपा की वापसी के लिए नए सीएम के साथ ही पुराने सारे मंत्रियों को बाहर करके नए लोगों को मौका दिया गया है। ताकि आने वाले चुनाव में नई सरकार के मंत्री अपने अल्पसमय के कार्यकाल के साथ मैदान में उतरे। सत्ता के प्रति विरोध को समाप्त करने के लिए भाजपा हाईकमान का फैसला कितना कारगर साबित होगा यह तो समय के गर्त में छिपा है। सीएम भूपेंद्र पटेल के नए मंत्रीमंडल से अपेक्षाएं अपार हे। शपथ ग्रहण से ठीक पहले विधानसभा स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने बतौर कैबिनेट मंत्री शपथ दिलाई गई। विजय रूपाणी कैबिनेट को बाहर करके भूपेंद्र पटेल कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल किया गया है। खास बात है कि बीजेपी से दूर हो रहे पटेल समुदाय को फिर से जोड़ने के लिए भूपेंद्र पटेल को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। बताया जा रहा है कि यही फॉर्मूला भाजपा ने गुजरात के निकाय चुनाव में आजमाया था और सफल रही थी। इसलिए पार्टी को पूरा भरोसा है कि उसका यह आजमाया फॉर्मूला विधानसभा चुनाव में भी कामयाब होगा। भाजपा ने पहली बार यह प्रयोग गुजरात में किया है कि मंत्रिमंडल में सारे चेहरे नए रखे हैं और पूर्व सीएम विजय रूपाणी की 22 मंत्रियों वाली पूरी टीम की छुट्टी कर दी गई है। अगले साल नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा किसी भी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं है इसलिए पूरी टीम को बदलने से भी उसे गुरेज नहीं है।  सत्ता विरोधी लहर की विदाई  नई टीम में किसी भी पुराने मंत्रियों को जगह इसलिए नहीं दी गई है कि ताकि सत्ता विरोधी लहर की आंच नए मुख्यमंत्री और नए मंत्रिमंडल तक नहीं पहुंचे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सरकार में अब सभी चेहरे नए हैं। पूरी टीम के बदल जाने से गुजरात में अब सत्ता विरोधी लहर ही नहीं बची। पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उनकी टीम के साथ ही इसकी विदाई हो गई है। पूरी टीम को बदल देने से जनता के सामने नई चेहरे होंगे। नई टीम नई ऊर्जा से सराबोर होगी और केंद्र सरकार की उम्मीदों के नाव पर सवार भी। गुजरात के विधानसभा चुनाव में नाम भूपेंद्र पटेल का चलेगा और चेहरा होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।  आपकों बता दें कि नई टीम के होने से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहजता से काम कर सकेंगे। पुरानी टीम के ज्यादातर सदस्य जिनमें उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल भी शामिल थे वे पहली बार 2017 में विधायक बने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से सीनियर हैं। नई टीम के साथ नई मुख्यमंत्री के लिए काम करना आसान रहेगा। यदि पुराने मंत्रिमंडल से किसी को रखते तो विवाद की स्थिति बनी रहती, क्योंकि जिन लोगों को नहीं लिया गया वे पार्टी के लिए परेशानी का कारण बन सकते थे।  पूरी टीम को बदलने के कारण चल रही कवायद और तनाव की वजह से नए कैबिनेट मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह को बुधवार को दो बार स्थगित किया गया था। गुजरात बीजेपी में इस बात को लेकर बहुत अधिक तनाव महसूस किया था जब पुराने मंत्रियों को इस बात की जानकारी मिली थी कि भाजपा नेतृत्व पुरानी पूरी कैबिनेट को बदलना चाहती है।  आपकों बता दें कि गुजरात में नरेंद्र मोदी के दिल्ली जाने से भाजपा धीरे—धीरे कमजोर होती जा रही है। वहीं हार्दिक पटेल द्वारा जमीन पर उतरकर कांग्रेस को मजबूत करना और आप की गुजरात में बढ़ती सियासी कदम को थामने के लिए बीजेपी को सख्त कदम उठाना ही पड़ा अगर बीजेपी हाईकमान इस तरह का कदम नहीं उठाती इस बार सत्ता में आने के लिए उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ता जिस तरह निकाय चुनाव में विरोधियों से टक्कर मिली थी, उसे देखते हुए बड़े कदम उठाना बेहद जरूरी थ।
बीजेपी से दूर हो रहे पटेल समुदाय को फिर से जोड़ने के लिए भूपेंद्र पटेल को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

गुजरात। पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में भाजपा की वापसी के लिए नए सीएम के साथ ही पुराने सारे मंत्रियों को बाहर करके नए लोगों को मौका दिया गया है। ताकि आने वाले चुनाव में नई सरकार के मंत्री अपने अल्पसमय के कार्यकाल के साथ मैदान में उतरे। सत्ता के प्रति विरोध को समाप्त करने के लिए भाजपा हाईकमान का फैसला कितना कारगर साबित होगा यह तो समय के गर्त में छिपा है। सीएम भूपेंद्र पटेल के नए मंत्रीमंडल से अपेक्षाएं अपार हे। शपथ ग्रहण से ठीक पहले विधानसभा स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने बतौर कैबिनेट मंत्री शपथ दिलाई गई। विजय रूपाणी कैबिनेट को बाहर करके भूपेंद्र पटेल कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल किया गया है। खास बात है कि बीजेपी से दूर हो रहे पटेल समुदाय को फिर से जोड़ने के लिए भूपेंद्र पटेल को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

बताया जा रहा है कि यही फॉर्मूला भाजपा ने गुजरात के निकाय चुनाव में आजमाया था और सफल रही थी। इसलिए पार्टी को पूरा भरोसा है कि उसका यह आजमाया फॉर्मूला विधानसभा चुनाव में भी कामयाब होगा। भाजपा ने पहली बार यह प्रयोग गुजरात में किया है कि मंत्रिमंडल में सारे चेहरे नए रखे हैं और पूर्व सीएम विजय रूपाणी की 22 मंत्रियों वाली पूरी टीम की छुट्टी कर दी गई है। अगले साल नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा किसी भी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं है इसलिए पूरी टीम को बदलने से भी उसे गुरेज नहीं है।

सत्ता विरोधी लहर की विदाई 

नई टीम में किसी भी पुराने मंत्रियों को जगह इसलिए नहीं दी गई है कि ताकि सत्ता विरोधी लहर की आंच नए मुख्यमंत्री और नए मंत्रिमंडल तक नहीं पहुंचे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सरकार में अब सभी चेहरे नए हैं। पूरी टीम के बदल जाने से गुजरात में अब सत्ता विरोधी लहर ही नहीं बची। पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उनकी टीम के साथ ही इसकी विदाई हो गई है। पूरी टीम को बदल देने से जनता के सामने नई चेहरे होंगे। नई टीम नई ऊर्जा से सराबोर होगी और केंद्र सरकार की उम्मीदों के नाव पर सवार भी। गुजरात के विधानसभा चुनाव में नाम भूपेंद्र पटेल का चलेगा और चेहरा होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

आपकों बता दें कि नई टीम के होने से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहजता से काम कर सकेंगे। पुरानी टीम के ज्यादातर सदस्य जिनमें उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल भी शामिल थे वे पहली बार 2017 में विधायक बने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से सीनियर हैं। नई टीम के साथ नई मुख्यमंत्री के लिए काम करना आसान रहेगा। यदि पुराने मंत्रिमंडल से किसी को रखते तो विवाद की स्थिति बनी रहती, क्योंकि जिन लोगों को नहीं लिया गया वे पार्टी के लिए परेशानी का कारण बन सकते थे।

पूरी टीम को बदलने के कारण चल रही कवायद और तनाव की वजह से नए कैबिनेट मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह को बुधवार को दो बार स्थगित किया गया था। गुजरात बीजेपी में इस बात को लेकर बहुत अधिक तनाव महसूस किया था जब पुराने मंत्रियों को इस बात की जानकारी मिली थी कि भाजपा नेतृत्व पुरानी पूरी कैबिनेट को बदलना चाहती है।

आपकों बता दें कि गुजरात में नरेंद्र मोदी के दिल्ली जाने से भाजपा धीरे—धीरे कमजोर होती जा रही है। वहीं हार्दिक पटेल द्वारा जमीन पर उतरकर कांग्रेस को मजबूत करना और आप की गुजरात में बढ़ती सियासी कदम को थामने के लिए बीजेपी को सख्त कदम उठाना ही पड़ा अगर बीजेपी हाईकमान इस तरह का कदम नहीं उठाती इस बार सत्ता में आने के लिए उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ता जिस तरह निकाय चुनाव में विरोधियों से टक्कर मिली थी, उसे देखते हुए बड़े कदम उठाना बेहद जरूरी थ।

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