इस संसार में श्रीराम-भरत जैसा भाई प्रेम ही अनुकरणीय : कमलनयन महाराज

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Brotherly love like Shri Ram-Bharat is exemplary in this world: Kamalnayan Maharaj
भ्राता भरत ने सिंहासन पर श्री राम की खड़ाऊ रख कर नंदीग्राम, भरतकुंड में अनवरत तपस्या की थी और राज्य का संचालन किया था।

बीकापुर/भरतकुंड- मनोज यादव। भगवान भरत के चरित्र की अनुकंपा, आप लोग करेंगे तो भाई-भाई में विवाद कभी नहीं होगौ राजा भोगी होता है तो प्रजा दुखी होती है, राजा त्यागी होता है तो प्रजा सुखी होती हैै यह बात छोटी छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयनदास महाराज ने मंगलवार को भरतकुंड पर तीन दिवसीय भव्य नंदीग्राम सांस्कृतिक महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को कहीं I इस दौरान महंत ने कहा की उन्होंने कहा कि श्रीराम वन चले गए, लेकिन भरत जी ने अयोध्या की गद्दी स्वीकार नहीं की। उन्होंने राजपाट को यह कहकर ठुकरा दिया कि अयोध्या की संपत्ति का अधिकारी में नहीं हूं, इसके हकदार रघुपति ही हैं। यह कहकर भरत सेवक बनकर चौदह वर्ष तक श्रीराम की पादुकाओं को सिंहासन पर स्थापित कर राज्य का संचालन करते रहे। वर्तमान समय में भाई-भाई में जो प्रेम का भाव हो रहा है, उसका मूल कारण है संपत्ति और स्वार्थ। अगर श्रीराम और भरत की तरह भ्रात प्रेम हो जाए तो सारा विवाद समाप्त हो सकता है।

तीन दिवसीय नंदीग्राम महोत्सव में राम कथा पर आधारित रामलीला के साथ धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अयोध्या में भरतकुंड पर प्रथम नंदीग्राम महोत्सव में सांस्कृतिक संध्या, भजन, यज्ञ, फरवाही नृत्य और रामायण कालीन पात्रों से जुड़ी नृत्य नाटिका आयोजन किया गया और रामायण काल में भरत के चरित्र का मंचन आयोजित की गई। सप्त सरोवर के चारों तरफ होते हुए 3 किलोमीटर की भरत यात्रा निकाली गई । भरतकुंड सरोवर पर 5100 दीप प्रज्वलित कर आरती उतारी गई I वहीं इस आयोजन में प्रदेश के पर्यटन मंत्री नीलकंठ त्रिपाठी एवं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के शामिल न हो पाने के कारण छोटी छावनी की उत्तराधिकारी कमल नयनदास जी महाराज, स्थानीय विधायक शोभा सिंह चौहान, अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्त व अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से बताया कि भगवान श्री राम के जीवन से जुड़े नंदीग्राम को और ऐतिहासिक स्वरूप दिया जाएगा। साथी देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस स्थान तक पहुंच सके इसका भी विशेष व्यवस्था के तहत योजना बनाई जा रही है।

महंत कमल नयनदास जी महाराज ने बताया कि विश्व में रामनगरी अयोध्या एक ऐसी नगरी है जहां पर राम के 14 वर्षों के वनवास के बाद उनके भ्राता भरत ने सिंहासन पर श्री राम की खड़ाऊ रख कर नंदीग्राम, भरतकुंड में अनवरत तपस्या की थी और राज्य का संचालन किया था। इसलिए इसे तपोभूमि के विकास को लेकर बृहद रूप में योजना बनाई जा रही है नंदीग्राम एक ऐतिहासिक स्थल है इसलिए इस को धार्मिक दृष्टि से विकसित किया जाना है ।

भरत हनुमान मिलन मंदिर के पुजारी संत परमात्मा दास, महोत्सव प्रभारी दिवाकर सिंह, व्यवस्थापक रामकृष्ण पांडेय, हरिओम पांडेय, विनय पांडेेय, रमाकांत द्विवेदी, मीडिया प्रभारी एवं महोत्सव के मंत्री पवन पांडेय, शरद मिश्र, कार्यक्रम के अध्यक्ष कपिल देव दुबे, कथावाचक तथा संरक्षक अमरनाथ पांडेय, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी शरद शर्मा, विवेक पांडेय सहित अन्य ने मंचासीन संतों को माल्यार्पण कर अंगवस्त्र तथा धार्मिक पुस्तके देकर सम्मानित किया ।भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव सिंह, साधन सहकारी समिति के अध्यक्ष टिल्लू सिंह, सपा के पूर्व विधायक अभय सिंह, युवा सपा नेता राघवेंद्र सिंह अनूप, सपा नेत्री रोली यादव, जिला पंचायत सदस्य राजा मानसिंह, राजेंद्र पांडेय, राकेश मिश्रा छोटन दुबे, अमर सिंह, शिवकुमार सिंं, बीकापुर ब्लाक प्रमुख दिनेश वर्मा, सूर्य नारायण दुबे रज्जू, अजय अजय पांडेय, हनुमंत पांडेय, अखिलेश पांडेय, भंडारे के प्रभारी व्यवस्थापक राजेंद्र पांडेय, पंडाल के व्यवस्थापक अंजनी पांडेय, मीडिया प्रभारी हरिओम पांडे राकेश मिश्रा सहित हजारों लोग मौजूद रहे।

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