अफगानिस्तान का मेवाड़, जिससे खौफ खा रहे है तालिबानी

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प्रतीकात्मक चित्र

अवनीश पांडेय।अफगानिस्तान के इतिहास में अरावली की पर्वत के तरह इतिहास लिखने वाला पंचशीर क्षेत्र की भौगोलिक बनावट दुर्ग के आकार का है। यह चारो तरफ से पर्वतो से घिरा हुआ है। यही कारण है कि इस क्षेत्र को पंचशीर घाटी के नाम से जानते है चारों तरफ से ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरे इस इलाके के बीच में मैदानी भाग है।

पंजशीर घाटी नॉर्दन अलायंस के पूर्व कमांडर अहमद शाह मसूद का गढ़ है। आपको जानकर हैरानी होगी कि एक तरफ जहां तालिबान देश के कई हिस्सों पर कब्जा कर चुका है वहीं, काबुल के पास स्थित पंजशीर पर चढ़ाई करने से आज भी खूंखार आतंकी संगठन हजार बार सोचता है। 90 के दशक में जब तालिबान ने अफगान पर कब्जा किया था उस समय भी पंजशीर पर वह अपनी हुकूमत थोपने में कामयाब नहीं हो पाया था।

अफगान में पंजशीर ही एक ऐसा इलाका है जहां के लोग तालिबान के आतंक के खिलाफ विद्रोह का झंडा बुलंद किए हुए हैं। अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह भी पंजशीर से ही ताल्लुक रखते हैं, काबुल में तालिबान के प्रवेश के बाद से वह यहीं रह रहे हैं। पंजशीर के खौफ का अंजादा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1980 से लेकर 2021 तक इसपर कभी भी तालिबान का कब्जा नहीं हो सका।

अमेरिका और रुस भी खाते थे खौंफ

अमेरिकी सेना और सोवियत संघ भी कभी पंजशीर पर जमीनी कार्रवाई नहीं कर सका, हालांकि कई बार हवाई हमले से यहां के लोगों के इरादे को कमजोर करनी की कोशिश की गई है। यहां की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि दुश्मन कभी भी जमीन पर से हमला करने के बारे में सोच ही नहीं सकता। पंजशीर पहुंचे उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने तालिबान को खुली चुनौती दी है, उन्होंने कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में तालिबान आतंकवादियों के सामने नहीं झुकेंगे।

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