Wednesday, October 5, 2022
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तालिबान के आगे घुटने टेकी अफगान सरकार, राष्ट्रपति भवन में चल रही शांति से सत्‍ता सौंपने की तैयारी

काबुल। पड़ोसी देश अपने अफगानिस्तान अपने बुरे दौर से गुजर रहा है। यहां लोकतंत्र से चुनी गई सरकार तालिबान के आगे कमजोर साबित हुई। तालिबानी लड़ाके एक के बाद एक शहर पर कब्जा जमाते जा रहे है। जैसे-जैसे तालिबान वैसे—वैसे सरकारी मशीनरियां पीछे हटती जा रही है। ताजा जानकारी के अनुसार रायटर ने अफगान आंतरिक मंत्रालय के हवाले से बताया है कि तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हर तरफ से घुसना शुरू कर दिया है। उन्होंने काबुल से जाने वाले रास्तों को अपने कब्जे में ले लिया है। वहीं, तालिबान ने एक बयान जारी कर कहा है कि उनका अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में जबरन घुसने का कोई इरादा नहीं है।

इससे पहले रविवार को तालिबान ने देश के सबसे बड़े शहरों में से एक नंगरहार प्रांत की राजधानी जलालाबाद शहर को अपने कब्जे में ले लिया है, जिसके कारण काबुल देश के पूर्वी हिस्से से कट गया है। अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार के नियंत्रण में अब काबुल समेत देश की 34 में से सिर्फ सात प्रांतीय राजधानियां ही बची है। एपी ने अफगान अधिकारी के हवाले से बताया है कि तालिबान के वार्ताकार सत्ता के हस्तांतरण की तैयारी के लिए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन जा रहे हैं।

टोलो न्यूज़ के मुताबिक, अफगानिस्तान के कार्यवाहक आंतरिक मंत्री अब्दुल सत्तार मिर्जाकवाल ने कहा कि राजधानी काबुल पर हमला नहीं किया जाएगा सब कुछ शांतिपूर्वक होगा। उन्होंने काबुल निवासियों को आश्वासन दिया कि सुरक्षा बल शहर की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

अशरफ गनी सरकार के एक पूर्व शीर्ष वरिष्ठ सलाहकार ने जलालाबाद के पतन की खबर की पुष्टि की, उन्होंने उम्मीद जताई है कि तालिबान प्रांत में नागरिकों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। शनिवार को अशरफ गनी ने अधिकारियों के साथ एक समन्वय बैठक की अध्यक्षता की। इस दौराना उनको काबुल और पड़ोसी प्रांतों की सुरक्षा के बारे में जानकारी दी गई थी। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में यूएस चार्ज डी’अफेयर्स रास विल्सन और अमेरिकी सेना कमांडर ने भाग लिया और दोनों ने अफगान बलों को अपना समर्थन देने की बात कही।

तेजी से निकल रहे विदेशी राजनयिक

आपकों बता दें कि अफगानिस्तान से अमेरिकी और नाटों बलों की वापसी के बाद से ही तालिबान लड़ाके देश पर हर ओर से कब्जा करते जा रहा है। तालिबान ने पिछले सप्ताह में अफगानिस्तान के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था जिसके बाद अफगानिस्तान की केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ गया है। उधर, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने वहां मौजूद अपने राजनयिक स्टाफ की मदद के लिए सैनिकों को भेजा है।

अफगानिस्तान के चौथे सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ पर शनिवार को चौतरफा हमलों के बाद तालिबान का कब्जा हो गया था और इसके साथ ही पूरे उत्तरी अफगानिस्तान पर चरमपंथियों का कब्जा हो गया। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि हम 20 वर्षों की उपलब्धियों को बेकार नहीं जाने देंगे। हाल के दिनों में तालिबान द्वारा प्रमुख क्षेत्रों पर कब्जा जमाए जाने के बाद से यह उनकी पहली सार्वजनिक टिप्पणी है।

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