साहित्य राजनीति के आगे चलने वाली एक मशाल है: शिव​ सिंह यादव

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Literature is a torch ahead of politics: Shiv Singh Yadav
वीरेंद्र त्रिपाठी ने मुंशी प्रेमचंद के साहित्य से नौजवानों को सीख ले कर एक बेहतर समाज के निर्माण हेतु अपनी जिम्मेदारी को सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

लखनऊ। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जयंती के अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय में स्थित प्रेमचंद की प्रतिमा पर “बिस्मिल अशफाक स्मृति मंच” के कार्यकर्ताओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। इस अवसर पर उपस्थित साथी वीरेंद्र त्रिपाठी ने मुंशी प्रेमचंद के साहित्य से नौजवानों को सीख ले कर एक बेहतर समाज के निर्माण हेतु अपनी जिम्मेदारी को सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर “बिस्मिल अशफाक स्मृति मंच के सह संयोजक शिवसिंह यादव जी ने कहा साहित्य राजनीति के आगे चलने वाली एक मशाल है और इस मशाल को जलाए रखने का काम आज छात्रों नौजवानों को बखूबी ढंग से करना पड़ेगा। इस अवसर पर स्मृति मंच के सहसंयोजक पुष्पेंद्र ने कहा कि आज साहित्य सिर्फ मनोरंजन का ही विषय नहीं है आम जनमानस के दुख दर्द को अपने साहित्य में जगह देने के लिए हम छात्र नौजवानों को अपनी भूमिका तय करनी चाहिए और लिखने की धार को भी तेज करना चाहिए। वक्ताओं की कड़ी में अमिताभ यादव , विप्लव सिंह ने भी इस संगोष्ठी को संबोधित किया।

अंत में संगोष्ठी का संचालन कर रहे बिस्मिल अशफ़ाक स्मृति के संयोजक यादवेंद्र ने छात्रों नौजवानों से अपील किया कि मौजूदा दौर भारतीय समाज एक चिंताजनक स्थिति से गुजर रहा है इस दौर में मुंशी प्रेमचंद जी के साहित्य को घर-घर में आम जनमानस में प्रतिष्ठित करने की जरूरत है। मुंशी प्रेमचंद जी के सुझाए हुए रास्ते जिसमें उन्होंने कहा सभी के लिए शिक्षा सर्व सुलभ और सभी के लिए शिक्षा मुफ्त होनी चाहिए और इसके खर्च का पूरा निर्वाहन विश्वविद्यालय को करना चाहिए। उन्होंने चिंता जाहिर किया राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा से सरकारें अपनी पल्ला झाड़ रही हैं निजी हाथों में देकर शिक्षा का खर्च छात्रों, नौजवानों, अभिभावकों पर डाल रही हैं। इस अवसर पर मंच के साथियों ने जलियांवाला बाग नरसंहार के जिम्मेदार जनरल डायर की लंदन जाकर हत्या कर प्रतिरोध लेने वाले शहीद उधम सिंह को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जो कि शिक्षा के निजीकरण, व्यापारीकरण, संप्रदायीकरण, व्यवसायीकरण का एक ड्राफ्ट है, के माध्यम से शिक्षा को एक बाजारू वस्तु के रूप में तब्दील किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को तत्काल रद्द किया जाए। सभी को जनवादी, धर्मनिरपेक्ष व वैज्ञानिक शिक्षा व नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित किया जाए इस मांग के साथ इस जयंती कार्यक्रम का समापन हुआ जिसमे विश्वविद्यालय के दर्जनों छात्र शामिल हुए।

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