ओवैसी के एक प्रस्ताव से यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल, अब अखिलेश के जवाब का इन्तजार

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Implement women's reservation, who is stopping you, then will the opposition parties give reservation?
इस आरक्षण में मुस्लिम और ओबीसी का अतिरिक्त आरक्षण होना चाहिए था।

लखनऊ। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और ओमप्रकाश राजभर ने भले से हाथ मिलाकर यूपी फतेह की योजना बनाई थी, लेकिन बीजेपी के सामने चित्त होते देख अपना पैतरा बदलना शुरू कर दिया। एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सपा मुखिया अखिलेश यादव के सामने एक प्रस्ताव दिया है, हालांकि इसको लेकर अभी तक अखिलेश की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। मालूम हो कि यूपी के चुनाव में जितने भी दल है सभी का एक ही मकसद है किसी तरह बीजेपी को सत्ता से बाहर करना। अभी कुछ दिन पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी बीजेपी को हराने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखी थी। प्रियंका ने साफ कहा था कि वह बीजेपी को हराने के लिए किसी से भी हाथ मिला सकती है अब देखना है कि बीजेपी के सामने कितना बड़ा गठबंधन खड़ा होता है।

यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को ऑल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-ए-मुस्लमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि अगर समाजवादी पार्टी यूपी में किसी मुसलमान को डिप्टी सीएम बनाती है तो वो उनके साथ गठबंधन को तैयार हैं। ओवैसी ने इसे और स्पष्ट करते हुए कहा कि अखिलेश यादव अगर यूपी में बीजेपी के खिलाफ खड़े हुए भागीदारी मोर्चे के किसी मुस्लिम विधायक को यूपी में उपमुख्यमंत्री बनाएगी तो वह उनके साथ गठबंधन करने को तैयार हैं।

आपकों बता दें कि सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी यूपी के 2022 में रण में 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। उनकी अधिकतर सीटें पश्चिमी यूपी में होगी। इसके लिए उन्होंने ओम प्रकाश राजभर की पार्टी एसबीएसपी के साथ गठबंधन भी किया। इस गठबंधन को उन्होंने भागीदारी संकल्प मोर्चा नाम दिया है। हालांकि उनकी इस मुहिम को तब बड़ा झटका लगा, जब आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह ने गठबंधन में जानें से इनकार कर दिया, चर्चा है कि कुछ छोटे दलों ने भी इनकार​ किया है। इसके पहले अखिलेश यादव ने किसी भी दल से गठबंधन नहीं करने की घोषण की थी, लेकिन जिस तरह से भाजपा घेराबंदी कर रही है और मुस्लिम वोटों के बटवारे से बचने के लिए इस गठबंधन की संभावना दिख रही है। हालांकि राजनीति में जब तक सबकुछ सामने नहीं आए तब तक कयास ही लगाए जा सकते है।

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