Tuesday, September 27, 2022
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जौनपुर में एआईडीएसओ ने चंद्रशेखर आजाद की 115वीं जयंती सम्मानपूर्वक मनाई

जौनपुर। देश के महान सपूत आजादी के दीवाने चंद्रशेखर आजाद की आज देशभर में जयंती मनाई गई। इस क्रम में छात्र संगठन एआईडीएसओ ने प्रदेश भर में कार्यक्रम आयोजित करके भारत माता के सपूत को याद किया।इसी क्रमी में जौनपुर के बदलापुर में भारतीय आजादी आंदोलन के गैर-समझौतावादी धारा के महान क्रांतिकारी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 115 वीं जयंती मनाई । इस अवसर पर ऑल इण्डिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन (AIDSO) के द्वारा देश भर में सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किये गये। बदलापुर क्षेत्र सहित जौनपुर जिले के विभिन्न हिस्सों में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम किए गए। सभी जगहों पर छात्रों द्वारा अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई और क्रांतिकारी व देशभक्ति गीत भी प्रस्तुत किए गए।

24 साल की उम्र में शहादत को प्राप्त किया

इस अवसर पर संगठन के प्रदेश सचिव दिलीप कुमार ने कहा कि, चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को एक साधारण परिवार में हुआ और ब्रिटिश साम्राज्यवाद से देश को स्वतंत्र कराने के क्रांतिकारी संघर्ष में 24 साल की उम्र में शहादत को प्राप्त हुए। आजाद जी सदियों तक आजादी पसंद छात्र – युवाओं व देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत व संघर्ष की उत्कृष्ट मिसाल के रूप में जिंदा रहेंगे। चन्द्रशेखर आज़ाद और उनके क्रांतिकारी साथियों का सपना था कि अंग्रेजों को भगाकर देश को स्वतंत्र कराएंगे और भारत में एक समाजवादी राज कायम करेंगे, जिसमें मनुष्य के द्वारा मनुष्य के शोषण का खात्मा हो जाएगा और सबके लिए रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा व सम्मान मुहैया कराई जाएगी और इस प्रकार अमन चैन खुशहाली देश में कायम होगी।

इसीलिए शहीद-ए-आजम भगतसिंह व उनके साथियों के द्वारा आजादी आंदोलन की लड़ाई लड़ रहे क्रांतिकारी संगठन- “हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन” के नाम में ‘सोशलिस्ट’ शब्द जोड़ते हुए “हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन” रखा गया और कमान्डर-इन-चीफ चन्द्रशेखर आज़ाद को चुना गया। लेकिन आजादी के 74 वर्षों के बाद भी चंद्रशेखर आजाद व उनके क्रांतिकारी साथियों का वह महान सपना आज भी अधूरा है।

पाठ्यक्रम से क्रांतिकारियों को निकालने की साजिश

चिंताजनक है कि शहीदों व क्रांतिकारियों के बारे में हमारे देश की सरकारें लंबी- चौड़ी वादे व बयान तो देती हैं लेकिन आज तक चन्द्रशेखर आज़ाद व भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों को शहीद का दर्जा तक नहीं दे पाईं। बल्कि इसके विपरीत हमारे स्कूल व कॉलेज के पाठ्यक्रमों से महान क्रांतिकारियों, साहित्यकारों व महापुरुषों के जीवन संघर्ष को निकालने की ही साजिश करती रही है। जिसका जीता जागता उदाहरण बीते सालों में स्नातक के हिन्दी पाठ्यक्रम से मुंशी प्रेमचंद की “गबन” उपन्यास को बाहर कर दिया गया और अभी हाल ही में अचानक, यूपी बोर्ड की 10वीं व 12वीं की अंग्रेजी के पाठ्यक्रम से कविगुरु रविंद्रनाथ टैगोर, डॉ.एस.राधाकृष्णन सहित कई अन्य लेखकों की रचनाओं को बाहर कर दिया गया है।

पाठ्यक्रमों में मनमाना परिवर्तन कर के जनवादी, वैज्ञानिक व धर्मनिरपेक्ष शिक्षा पद्धति पर करारा प्रहार किया जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के द्वारा शिक्षा के निजीकरण, व्यापारीकरण, साम्प्रदायीकरण व फासीवादी की प्रक्रिया को तेज करते हुए छात्रों को शिक्षा से दूर करने की कोशिश की जा रही है। इस तरह हमारे देश के नवजागरण काल व आजादी आंदोलन के महापुरूषों व क्रांतिकारियों के सपने को कुचलने की नापाक कोशिश की जा रही है, जिसके खिलाफ छात्र संगठन AIDSO अपने स्थापना काल से कटिबद्ध है और हमेशा क्रांतिकारियों व महापुरुषों के जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम में यह लोग रहे

इस अवसर पर सन्तोष प्रजापति, सोनम मौर्य, राजकुमार, पूनम के अलावां मिथिलेश कुमार मौर्य ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में सत्यम, अमित, अंजली, सेराज, विवेक, अजय, चंदा आदि छात्र छात्रायें मौजूद रहे।

लखनऊ में संगोष्ठी में आजाद के विचारों को किया याद

लखनऊ। आजादी आंदोलन में गैर समझौतावादी धारा के HSRA के कमांडर इन चीफ शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर ” बिस्मिल अशफ़ाक स्मृति मंच” के द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय में स्थित आज़ाद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक संगोष्ठी आयोजित की गई जिस का संचालन बिस्मिल अशफ़ाक स्मृति मंच के सह -संयोजक शिव सिंह यादव ने किया। इस अवसर पर पुष्पेंद्र, रामकुमार, अब्बास, विशाल, अमिताभ, व बिस्मिल अशफ़ाक स्मृति मंच के संयोजक यादवेंद्र जी ने अपनी बात रखी ।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में आजाद के सपनों का हिंदुस्तान बनाने का दृढ़ संकल्प लिया । चंद्रशेखर आजाद का जीवन संघर्ष आज छात्रों के लिए प्रेरणादाई स्रोत के रूप में कार्य कर रहा है उनका संघर्ष हम लोगों को सिखाता है कि शोषण, जुल्म, अत्याचार के खिलाफ जनता के बीच में जाकर जन आंदोलन का निर्माण कर संगठित होकर लड़ाई लड़कर एक शोषण विहीन समाज की स्थापना कर इस शोषण जुल्म से मुक्त समाज की स्थापना की जा सकती है। इस अवसर पर एक शाम 6 बजे से एक ऑनलाइन वेबीनार का भी आयोजन हुआ जिस का संचालन बिस्मिल अशफ़ाक स्मृति मंच के सह-संयोजक पुष्पेंद्र ने किया और मुख्य वक्ता के रूप में एआईडीएसओ छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हर शंकर जी ने इस वेबीनार को संबोधित किया । लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े दर्जनों छात्रों , शहर के बुद्धिजीवी व अभिभावक ने इस वेबीनार में हिस्सा लिया। बेबिनार में अन्य वक्ता के रूप में शिवसिंह, विप्लव, व यादवेन्द्र ने भी संबोधित किय।

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