Wednesday, October 5, 2022
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पिता-भाई के बाद महिला प्रोफेसर ने भी आग लगाकर किया आत्मदाह, देखती रह गई बेटी

वाराणसी। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां एक महिला प्रोफेसर ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली, जब महिला खुद को कमरे में बंद करके आग लगा रही थी तो उसकी बेटी उसे बचाने के लिए रोती रहीं, लेकिन वह कामयाब नहीं हुई। यहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में सोमवार की दोपहर में एक महिला प्रोफेसर ने खुद को आग लगा ली। इससे प्रोफेसर की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पुलिस और फॉरेंसिक की टीम पहुंच गई। वह घटना के बारे में जांच कर रही है। इसके साथ ही सूचना मिलते ही बीएचयू के छात्र और प्रोफेसर भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं।

विवि से मिली जानकारी के अनुसार प्रो. किरन सिंह विज्ञान संस्थान में मॉलिक्यूलर एंड ह्यूमन जेनेटिक डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर थीं। वह सरोजनी हॉस्टल की एडमिन वॉर्डन थीं और इस समय गार्गी हॉस्टल के एडमिन वॉर्डन के आवास में रह रही थीं। सोमवार को वह अपनी 11 साल की बच्ची एनी के साथ घर में अकेली थी, पति विवेक सिंह किसी काम से घर से बाहर गए थे।

महिला प्रोफेसर के आत्मदाह की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ी भी मौके पर पहुंची। कुछ देर में ही आग पर काबू पा लिया। लेकिन तब तक उनकी मौत हो गई थी। उन्होंने किस वजह से आग लगाई थी, उस बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही आगे की जांच कर रही है।

बेटी खेल रही थी ग्राउंड फ्लोर के कमरे में

मूलरूप से गोरखपुर की रहने वाली डॉ. किरण (45) सरोजिनी नायडू हॉस्टल परिसर में बने सरकारी आवास में पति विवेक सिंह और बेटी स्वयंप्रभा उर्फ एनी के साथ रहती थी। डॉ. किरण के पति विवेक किसी काम से भोजूबीर गए थे। बेटी ग्राउंड फ्लोर के कमरे में खेल रही थी। डॉ. किरण का नौकर राजेंद्र प्रसाद उनके आवास की साफ-सफाई करने के लिए सोमवार सुबह आया था, लेकिन डॉ. किरण ने मना करके नौकर से कल आने को कहा था। इसी बीच उनकी बेटी ने देखा कि घर के फर्स्ट फ्लोर पर बने कमरे से धुआं बाहर निकल रहा है। बेटी की चीखें सुनकर आसपास के लोग दौड़े। हालांकि, आग बुझाने से पहले ही डॉ. किरण की मौत हो चुकी थी।

अवसादग्रस्त रहती थीं डॉ. किरण

बताया जा रहा है कि किसी बीमारी की वजह से इनका गर्भाशय निकाल दिया गया था। इस वजह से यह अवसाद ग्रस्त रहती थीं। इसका जिक्र वह अपने सह कर्मियों से भी करती थीं। इनके पिता और भाई भी इनसे पहले सुसाइड कर चुके हैं।डॉ. किरण की आत्महत्या की सूचना पाकर लंका थाने की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। लंका थानाध्यक्ष महेश पांडेय ने बताया कि प्रथमद्रष्टया यही समझ में आया है कि कागज जलाकर प्रोफेसर ने आग लगाई हैं। फिलहाल फॉरेंसिक टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रही है।

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